Monday, 12 August 2024

बुद्धि,विवेकी पुरुषों की बातों को सुनता,

संग कभी पौराणिक आख्यानों को चुनता |

वही  सामने  आप सभी  के  मैं रखता हूँ,

                                                    साथ  कल्पना  के  ताने बानों को चुनता | 

Sunday, 11 August 2024

 तुलसीदास=

हिन्दी  के  साहित्य  में राम  रहे  हैं  पास,

उनके  चरणों  में  झुके धरती  औ  आकाश.

वे जीवित  हैं  आज, जियेंगे युगों  युगों तक,

हिन्दी के साहित्य शिरोमणि सबकेतुलसीदास.

 

(ब    रामचरित मानस को लिख कर,

किया विश्व में अपना नाम,

वेद, पुराण,उपनिषद को भर,

कर डाला ऐसा  था काम.

राम नाम की महिमा गा कर,

घर घर में  बैठे श्री राम,

तुलसी को रवि माना जग ने,

हम उनको बस करें प्रणाम.|


Saturday, 10 August 2024

 

वृक्ष मौन पर सदा शान्ति के फल उगते हैं,

जो  होते  वाचाल,कलह  उनके  फलते हैं l

जो सुन्दर हो,वही श्रेष्ठ हो,आवश्यक क्या ?

लेकिन  जो  हो श्रेष्ठ, वही सुन्दर लगते हैं l

 

Friday, 9 August 2024

परमारथ संग दान पुण्य का, जिसको मिले सुभीता,

भक्ति भाव  उसकी रामायण, और कर्म  है गीता |

ईर्ष्या,द्वेष,घृणा,चिन्ता को,छोड़ सका जिसका मन,

                                       जीवन उसका धन्य समय यदि, परोपकार में  बीता | 

Thursday, 8 August 2024

 

वृक्ष मौन पर सदा शान्ति के फल उगते हैं,

जो  होते  वाचाल, कलह  उनके  फलते हैं l

जो सुन्दर हो,वही श्रेष्ठ हो, आवश्यक क्या ?

लेकिन  जो  हो श्रेष्ठ, वही सुन्दर लगते हैं l

Wednesday, 7 August 2024

परोपकार में जीवन बीते, जिसको मिले सुभीता,

सुख,दुःख में जो रहा एक रस,समय एक रस बीता |

संयम नियम आचरण सम हैं, उसने जग को जीता,

                                           जो संतृप्त करे औरों को, पनघट कभी न रीता | 

Tuesday, 6 August 2024

 

कर्म प्रधान  मानते जग में, वे रहते  सानन्द

सिद्धि साधना में रत जो  हैं, पाते परमानन्द l

जागो,उठो,बढो तुम आगे,तुम्हें लक्ष्य तक जाना,

सत्य  आचरण जो अपनाये, वही विवेकानन्द l

Monday, 5 August 2024

 

फासला घट जायगा, हमदम बनाओ,

हो सके तो तुम किसी का गम मिटाओ |

शान्ति सुख पा जावगे यह देखना तुम,

बस  किसी के घाव पर मरहम लगाओ |

Sunday, 4 August 2024

चढ्ना है  पहाड़  के ऊपर, झुक  कर चढना होगा,

अगर चाहते मन्जिल पाना, रुक कर  चलना होगा |

अकड दिखा कर जो भी चलता, ठोकर खा गिर जाता,

                                         लक्ष्य प्राप्ति हित,हो प्रयास रत्, गिर कर उठाना होगा | 

Saturday, 3 August 2024

 

हमको क्या करना है जग में, लक्ष्य बनाओ निश्चित,

जीना,मरना तो  जीवन क्रम,भटके, हुये  पराजित |

आये हैं  किस हेतु  धरा पर, इस पर  करिये मंथन |

व्यर्थ जायगा यह जीवन ही, फिर क्या मिले कदाचित |

Friday, 2 August 2024

हम सुधरेंगे, जग  सुधरेगा, यही  बात  है  शास्वत,

दृष्टिकोंण बदलें हम अपना, इस में है अपना  हित |

गुण अन्वेषण हो स्वभाव में, हम समाज में  जाएँ,

                                             घृणा, द्वेष, दुर्भाव त्याग कर, खुद को करें समर्पित | 

Thursday, 1 August 2024

 

दोष दूसरों  के  मत  देखो, झाँको  अपने  अन्दर,

मिथ्या अंहकार  बढ़  जाता,  क्रोध, घृणा आते घर |

देखो तुम  अपने  दोषों को, स्वयं  सुधर  जाओगे,

सामजिक  अपराधी  कोई,  दण्ड दिलाओ  जी भर |