Tuesday, 18 September 2018

करें हम जागरण


जब कभी भी यदि बिगड़ते आचरण,
स्वार्थ लिप्सा का तने यदि आवरण l                                                  तो  आज  मानव धर्म  समझाएं उसे,
दायित्व है अपना, करें हम जागरण l

Thursday, 13 September 2018

पापों का परिणाम जनता,


पापों का  परिणाम जानता, व्यक्ति मृत्यु से  है  घवड़ाता ,
 व्याकुल हो  डरता रहता है, इसीलिये  हर  क्षण पछताता.
 धर्म, कर्म, सत्संग करोगे, तो भविष्य  भी  होगा उज्ज्वल,
 यदि यह हो विश्वास हृदय में, स्वर्ग,मोक्ष ही वह नर पाता.


Friday, 7 September 2018

आपका दिल

इस सदी में, आपके चेहरे  पे  भी मुस्कान है,
पूंछता हूँ,दिल तुम्हारा क्या बना पत्थर का है ?

उपकारी ही धन्य होते हैं.


फल देतें  हैं  सदा सभी को, वृक्ष नहीं कुछ खाते,
धरती   को सिंचित करते ही,बादल फिर उड़ जाते l
प्यास बुझाती प्यासे की ही, सरिता लब जल पीती,
पर  उपकारी  जो  होते  हैं, धन्य  वही  हो पाते l

Sunday, 2 September 2018

जहाँ चाह है, वहीं राह है.


इर्ष्या मन में जगे, समझ लो यही डाह है,
पाने  की  इच्छा हो मन में, यही चाह है l
प्रगति पन्थ पर बढने की जिज्ञासा मन में,
सत्य  यही  है, “जहाँ चाह है  वही राह है”l

Wednesday, 29 August 2018

श्रृद्धांजली

श्री पूरन  जी जिला जालौन के प्रसिद्ध कवि एवं रंगकर्मी थे,

पूरन जी  अब  नहीं रहे  हैं, कौन किसे  बतलाये,
पंचतत्व  में  लीन  हो  गये,  इसे  कौन  झुठलाये.
अब तो पूर्ण विराम लग गया, मौन हुये हैं हम सब,
साहित्य जगत में  सूनापन है, कौन राह दिखलाए.
                      डा० हरिमोहन गुप्त 

Friday, 24 August 2018

भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेई सृद्धान्जलि,


भारत रत्न स्मृति शेष श्री अटल बिहारी बाजपेई
श्रृद्धांजलि
ओ महान कवि,युग द्रष्टा,ओजस्वी वक्ता,
जो जीवन में, सदा नये रंगों  को भरता.
नई दिशा  दी भारत को, आगे बढ़ने की,
ओ दधीच! तुम जैसा कोन य्हन्हो सकता?
           मौत खड़ी हो जहाँ सामने उसको भी ललकारा,
           रुक जाओ  “स्वाधीन दिवस” भारत  का प्यारा.
           कल चल सकता, विजय “काल के कपाल”पर है,
           ओ नायक ! अब  बोझ उतारा तन  का  सारा.
साहस इतना  अडिग, हिमालय  से  भी  ऊपर,
तुम गम्भीर कि सागर स्वयम सिमिटता भीतर.
पथ संचालक ! तुमने अपनी राह बनाई,
ओ सर्वोत्तम !
नई  चेतना,  नई  दिशा  दी  आगे  बढ़ कर.
            सभी जानते  जो  भी आया गया यहाँ से,
            राम, कृष्ण भी देश छोड़ कर गये जहाँ से.
            उसी लीक पर तुमने भी चल कर दिखलाया,
            ओ शुभ चिन्तक ! तुम भी रहते यहाँ कहाँ से.
“मैं जी भर जिया,लौट कर आऊंगा यह वादा,
वाक्य  प्रेरणा श्रोत,  बात  सीधी  है  सादा.
“प्यादे से  बन कर वजीर” यह ही दिखलाया,
मन  में  हो विशवास और हो  नेक  इरादा.
            लेकिन तुमने जाते जाते  यह दिखलाया,
            भारत अब  सिरमोर जहाँ में  ऐसा पाया.
            उत्तराधिकार दे करके जिसको भार दिया है,
            राह आपकी  चल कर  जिसने गौरव पाया.
आओगे तुम नये रूप में, यह मन कहता,
इस पीढ़ी में आज यही तो सपना पलता.
देखोगे तुम  नये रूप में  इस भारत को,
ऐसा द्रढ़ विश्वास  बनोगे  कर्ता  धरता.
             गीतों के माध्यम से  जो दी थी काव्यांजलि,
             जाने से अब क्या कह दें ? रीती है अन्जलि.
             नये ढंग से  अब  गीतों  को  लिखना होगा,
             भारत रत्न “अटल” तुमको सच्ची श्रृद्धांजलि .
कैसे मानूँ  कभी अटल जी मर  सकते  हैं,
उनके जो सिध्दान्त,उन्हीं पर यदि चलते हैं.
तो मानो यह सत्य, अटल जी नहीं मरेगें,
पद चिन्हों में, शीश आज सबके झुकते हैं.
               डा० हरिमोहन गुप्त

Saturday, 11 August 2018

फर्ज


मुर्गा जो बांग दे कर, सुबह  सबको जगाता है,
शाम को प्लेट में सजकर, सदा को सो जाता है,
उसके उत्सर्ग का यह हश्र होगा, वह क्यों सोचे ?
जगाने  का फर्ज  है उसका, वह  तो निभाता है l

Wednesday, 8 August 2018

माँ वाणी


माँ वाणी मुझ पर रखो, सदा दाहिना हाथ,
कृपा अनवरत ही रहे, सदा रहो तुम साथ l
             लेखन में गति हो सदा, ऐसा हो अभियान,
             गागर में सागर भरूँ, जग का हो कल्याण l
ऐसा कुछ मैं लिख सकूँ, जिसमें हो कुछ सार,
जन  कल्याणी  योजना,  ऐसे  रहें  विचार l
             मैं गुण गाऊँ आपके, आप गुणों की खान,
             काव्य सुधा बरसे यहाँ, बढ़ जाए मम ज्ञान l
क्या  वर माँगू  आपसे,  तुमसे  मेरा मान,
काव्य जगत में बन सके, मेरी भी पहिचान l

Saturday, 4 August 2018

श्रृद्धांजलि


राष्ट्र कवि श्री मैथिली शरण गुप्त=
सुप्त राष्ट्र जाग्रत करने में, कौन  था उनके सद्दश,
उद्घोषक, युग द्दष्टा का  ही, फैलता  जाता सुयश.
यह रहा इतिहास कवि  ही, राष्ट्र का  प्रेरक रहा है,
राष्ट्र कवि सम्मान में हम सब मनाएं “कवि दिवस”

Tuesday, 31 July 2018

कद बड़ा है आपका बस, शाम की परछाई सा


कद बड़ा है आपका बस, शाम की परछाई सा,
असलियत का तो पता, सूरज सुबह बतलायगा l
 सत्य होंगे सब उजागर, दोपहर कल  धूप में,
ध्यान से जब देखना,तो खुद समझ आ जायगा l
                ओढ़ करके यह लबादा, ढोंग का कब तक चलेगा,
                तथ्य जब होंगे उजागर, तब  पता  चल जायगा l
दाग  चेहरे  पर  लगा है, क्या पता है आपको,
आइना बस देखियेगा, खुद व खुद दिख जायगा l
                आप गदगद हैं कि शायद, आपका कद बढ़ रहा,
                दूसरे नापें  ऊँचाई,  तब  कोई   कह  पायगा l
मैं  बड़ा  हूँ, तू  नहीं है, यह लड़ाई आज भी,
सब बराबर हैं जमी पर, कौन यह समझायगा l
                पैर छू लूँगा बड़े के, स्वयम छोटा मान  कर,
                कौन है सबसे बड़ा, यह तो पता चल जायगा l
चार कदमों बाद ही, कहने लगे हम थक गये,
जिन्दगी लम्बा सफर, कैसे  कहो कट पायगा l
                 आप झुक कर तो मिलें, बस आपसे जो भी मिले,
                 आपका कद  तो  बड़ा बस, आप  ही हो जायगा l   


Monday, 23 July 2018

श्रद्धांजलि

श्रद्धेय श्री नीरज को श्रद्धांजलि


जिन्दगी  का मौत  से  ऐसा  लगाव  है,
बदले हुये  लिवास  में  आना स्वभाव है.
थककर सफर में कोई सुस्ताने लगे पथिक,
मैं  सोचता  हूँ  मौत  ही  ऐसा  पडाव  है.
                            डा० हरिमोहन  गुप्त,

Saturday, 21 July 2018

करे तीर का काम,


                      मिथ्या आग्रह, कटुवचन, करे तीर का काम,
                      स्वाभाविक यह प्रतिक्रया, उल्टा हो परिणाम
                             धन संग्रह नहिं धर्म से, उसका करिये त्याग,
                             यथा सर्प  की  केचुली, नहीं  लगेगा  दाग l

Tuesday, 17 July 2018

अब पुराना होरहा है यह मकान


 अब पुराना हो रहा है यह मकान,
                    देखो खिसकने लगीं ईटें पुरानी,
                    झर रहा प्लास्टर कहे अपनी कहानी।
           ज रही अब मिटाने पुरानी शान,
          अब पुराना हो रहा है यह मकान।
                     जब बना था मजबूत थे सब जोड़,
                     रंग रोगन अच्छा रहा बेजोड़।
         सोचता था यह बहुत मजबूत है,
         समय से ,यह खो रहा पहिचान।
         अब पुराना हो रहा यह मकान।
                    जिन्दगी बस इसी ढ़ंग से है बनी,
                    नित नई हैं अब समस्यायें घनी।
         अमर ऐसी कोई काया नहीं,
         सामने दिख रहा, पास में शमशान।
         अब पुराना हो रहा है यह मकान।
                    फट रहे हैं वस्त्र अब वे हैं पुराने, हों नये ही वस्त्र अब मन को लुभाने।
         जो यहाँ आया, गया जगरीत यह, धन्य वह, मिले जाते समय सम्मान।
        अब पुराना हो रहा है यह मकान। 

Friday, 13 July 2018

मिले राम का धाम


राम चरण रज पा सके, कविश्री “तुलसीदास”,
चरण वन्दना हम  करें, राम  आयंगे  पास l
                    
                      रामचरित मानस लिखा, तुलसी के हैं राम,
                      गुण गायें हम राम के,मिले राम का धाम l

Wednesday, 11 July 2018

कर्म किये जा,


 धर्म आचरण का पालन कर, धर्म जिये जा,
अहंकार को  छोड़, छिपा यह  मर्म जिए जा.
काम, क्रोध, मद, लोभ, सदा से शत्रु रहे हैं,
फल की इच्छा क्यों करता, तू कर्म किये जा.

Monday, 9 July 2018

पारस मणि श्री राम


                        पारस मणि श्री राम हैं, सत्संगति संयोग,
                        कंचन मन हो आपका,करलो तुम उपयोग l
                राम नाम की ओढनी, मन में स्वच्छ विचार,
                फिर देखो  परिणाम  तुम, बहे प्रेम की धार l

                       

Thursday, 5 July 2018

जितनी कम जिसकी इच्छाएं


जितनी कम जिसकी इच्छायें, उसकी सुखी  रही है काया,

विषय भोग में लिप्त रहा जो, उसने दुख को ही उपजाया
.
सब ग्रन्थों का सार यही है, सुख दुख की यह ही परिभाषा,

तृष्णा, लोभ, मोह को छोड़ो, संतों ने  यह  ही दुहराया.

Monday, 2 July 2018

सामर्थ है तुममें


फौलाद की   चट्टान को भी फोड़ सकते हो,

कोई कठिन अवरोध हो तुम तोड़ सकते हो l

तुम युवा हो, बस इरादा नेक सच्चा चाहिये,

सामर्थ  है तुम में, हवा रुख मोड़ सकते हो l

Friday, 29 June 2018

कवि


कवि ही ऐसा प्राणी है जो, गागर में सागर को भरता
केवल वाणी के ही बल पर, सम्मोहित सारा जग करता,
सीधी, सच्ची, बातें कह कर, मर्म स्थल को वह छू लेता
आकर्षित हो जाते जन जन, भावों में भरती है दृढ़ता l

Saturday, 23 June 2018

राम कथा


राम कथा अमृत कथा, विष को करती दूर,
विषय वासना हट सके, यश मिलता भरपूर l
                  राम कथा जिसने लिखी, लिया राम का नाम,
                  राम रंग  में  रंग गया, माया का क्या काम l

Sunday, 17 June 2018

थलचर प्राणी


नभचर,जलचर, जब खेमों में नहीं बंटे हैं,
थलचर प्राणी क्यों आपस में लडे कटे हैं,
हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,
मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं 

Saturday, 16 June 2018

ईद

ईद पर सभी मित्रों को  शुभ कामनाएं,
                             आपका
                              डा० हरिमोहन गुप्त 

Friday, 15 June 2018

प्रतिभा शाली


जिसकी बुद्धि प्रखर होती है,वही व्यक्ति मेधावी होता,

मेधावी  ही  आगे  बढ़  कर, प्रज्ञावान प्रभावी  होता l

अगर विवेकी बनना है तो, बस सत्संग सदा आवश्यक,

गुणी, पारखी और विवेकी, वह  ही प्रतिभा शाली होता l

Sunday, 10 June 2018

नारी की पीड़ा


जो पीड़ित हो बलात्कार से , इस में उसका दोष रहा क्या ?
कब तक वह प्रस्तरवत होगी , पूँछ रही है आज अहल्या ?

Thursday, 7 June 2018

देश जाग्रत है सदा साहित्य से,


जग प्रकाशित है सदा आदित्य से,
हम प्रगति करते सदा सानिध्य से,
कोई  माने, या    माने  सत्य  है,
देश जाग्रत  है  सदा  साहित्य  से l