Tuesday, 6 February 2024

 

मन्द बुद्धि कम्बल सदृश ,सादा बुद्धि सुजाग,

             बांस सरीखी  जो  फटे, होती  बुद्धि  कुशाग्र |

 

     

       मेधा शक्ति बढाइये, लें विवेक  से  काम,

       वंश बुद्धि यदि हो गई,करते सभी सलाम l

Monday, 5 February 2024

  ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार l ईश्वर बड़ा दयालु है, रक्षक है वह आप,

      क्यों उससे मुख मोड़ते, करते पश्चाताप l

               

                 जिसकी जैसी भावना, वैसी  मानो  यार,

                 जुड़ा हुआ है भाव से, यह जीवन का सार lvvvvv

Sunday, 4 February 2024

       मानो तो वह ऐक है, यह संसार असार,

      ऐसा कुछ होता नहीं, निराकार, साकार l

 

              जीवन गारा व्यर्थ में, लिया न प्रभु का नाम,

              पछताता  हूँ  मैं  स्वयम, बिगड़े  सारे काम l

Saturday, 3 February 2024

 

ईश्वर अल्ला  ऐक  है, गीता  पढ़ो कुरान,

      सत्य अहिंसा साथ में, क्षमा,शील अरु दान l

 

                  द्वेत और अद्वेत में, फँसा आज संसार,

                  निराकार ही मान कर, भजो उसे साकार l

 

Friday, 2 February 2024

  भौतिक सुख, सुख मानते, कारण है अज्ञान,

       सच्चा सुख आध्यात्म सुख, अनुभव है जान l

             

               उसकी यदि होगी कृपा, होगा तब आभास,

                नहीं दूर वह आपसे, वह  तो  रहता पास l       

Thursday, 1 February 2024

करते करते लोभ  को, निकल  जांयगे प्राण,

              पछताओगे तुम बहुत, दिया न कुछ भी दान l                

 

      बनी  कसोटी  प्रेम  की, उसमें  हो  अनुराग,   

      मिल सकता है वह अभी, प्राणी अब भी जाग l

 

                   कहते कहते थक गये, जुड़ा नहीं संयोग,

                   उसको पाने के लिए, पीछे  फिरते लोग l

 

       

Wednesday, 31 January 2024

 

 रुको नहीं  बढ़ते चलो, मंजिल  होगी पास,

               तुम उंचाई छू सकोगे, मन में यदि विश्वास l

 

      करते यदि हरि स्मरण, मिल जाता मनमीत,

     अब पछताना व्यर्थ है, जुड़ी  न  उससे प्रीति l

Tuesday, 30 January 2024

 

महात्मा गांधी के प्रति श्रद्धान्जलि--

एक प्रश्न जाग्रत था मन में,

मानव क्या जिन्दा रहता है,

मर कर भी इस जग में ?

रुक जाती है श्वास.

हृदय स्पन्दन रुकता,

लेकिन कुछ के वाणी के स्वर,

गूँज रहे रग रग में |

मेरा कुछ ऐसा विचार है,

प्राणी के ही कर्म और गुण जिन्दा रहते,

मिट्टी की यह देह मरे,मरे जाए तो क्या?

जग के सम्मुख वाणी के स्वर,

मानवता जिन्दा रहती है |

जब तक हममें,

सत्य, अहिंसा, क्षमा, दया का भाव,

धरा पर धर्म कहाए,

विश्व बन्धु का पाठ, परस्पर प्रीत बढ़ा कर,

सुख समृद्धि, शान्ति हित जीवन,

सन्तत ऐसी फसल उगाये |

हिन्दू,मुसलमान, ईसाई,

हरिजन को भी गले लगा कर,

कहें परस्पर भाई भाई,

ऐसे स्वस्थ विचार अगर जीवित हैं मन में,

तो गान्धी जिन्दा हैं मानो,

हम सबके ही तन में |

इसीलिए तो शायद गांधी नहीं मरे हैं,

नहीं मरेंगे |

युग युग तक उनके चरणों में,

जाने कितने शीश झुकेंगे |

       डा0 हरिमोहन गुप्त

Monday, 29 January 2024

 शील  प्रमुख  संसार में, रक्खें  हम  सामर्थ,

       शील नष्ट यदि हो गया, जीवन का क्या अर्थ l

 

                उसे ढूढने  के  लिए, पढ़े  अनेकों  ग्रन्थ,

                 उससे मिलना सुलभ है, कोई भी हो पन्थ l

 

 

Sunday, 28 January 2024

 

 निज हित जैसा चाहते, दो परहित भी मान,

     जो दोगे  सो पावगे, ज्यों का  त्यों सम्मान |

 

             भौतिक सुख में सुख नहीं, सच्चा सुख है दान,

             निकल तिमिर अज्ञान से, मिल जाएँ भगवान |

 

Saturday, 27 January 2024

 

प्रभु की महिमा, नाम गुण, देखें सदा चरित्र,

     श्रृद्धा से नित ही सुनें, भगवत कृपा पवित्र |

 

             मन में चिन्तन ईश का, नित्य करें गुणगान,

             जो उसको  सुमरे सदा,  हृदय बसें  भगवान |

Thursday, 25 January 2024

 

 स्तुति पा हर्षे नहीं, ना निन्दा सुन शोक,

            दोनों में समभाव हो, वह महान इह लोक |

    

     प्रभु की महिमा, नाम गुण, देखें सदा चरित्र,

     श्रृद्धा से नित ही सुनें, भगवत कृपा पवित्र |

 

Wednesday, 24 January 2024

 

               आधी  रोटी  खाइये,  रहे  इरादा  नेक,

              तो पूरी तुम  खावगे, आडम्बर तो फेक l

 

    लोभ,मोह, आलस्य, मद, पर निन्दा हैं दोष,]

     जिज्ञासा,संयम, लगन, ध्यान,शील, सन्तोष l]--  

 

           खाएं हरदम बाँट कर, बोलें रसमय बोल,

      प्रेम पगे,अति नम्र हो, यही धर्म अनमोल |

Tuesday, 23 January 2024

  निद्रा ,मैथुन, भूख, भय, नर पशु  में है  ऐक,

         बुद्धिमान पशु से अधिक,नर में अधिक विवेक l

 

     फिर भी पशु संयम करें, नर को है धिक्कार,

    चारों  में  है  अतिक्रमण, गलती  बारम्बार l 

Monday, 22 January 2024

  नैतिक जो उपदेश हैं, करें सभी अभ्यास,

              जीवन संभलेगा तभी, होगा बुद्धि विकास l

 

        विकृति आये सोच में, मन में पनपे स्वार्थ,

        कर्तव्यों  से  विमुख जो, कैसे  हो परमार्थ l 

Sunday, 21 January 2024

 जो  चाहो   ऐकाग्रता,  इच्छा  शक्ति  प्रधान,

             मन प्रसन्न यदि आपका, सुख दुख ऐक समान l

 

       पर निन्दा  से  जो बचा, रक्खा जिसने मौन,

      तन मन जिसका शुद्ध है, उससे बढ़ कर कौन l   

Saturday, 20 January 2024

                                  उसे ढूढने  के  लिए, पढ़े  अनेकों  ग्रन्थ,

                 उससे मिलना सुलभ है, कोई भी हो पन्थ l

 

        सम्प्रदाय  हैं बहुत  से, अपना  अपना  ज्ञान,

        निर्बल को प्रभु मिल सका, उसका रक्खा मान l    

Friday, 19 January 2024

यही बात बस प्रमुख है, सबने पढ़े पुराण,

      सुख दुख में समभाव हो,गीता पढो कुरान l

           

             शब्द तौल कर बोलिये, भाषा शिष्ट समान,

              मन्त्र मुग्ध संजीवनी, मिले  तुम्हें सम्मान l 

Thursday, 18 January 2024

 

 यदि घमण्ड बढ़ता कभी, होता नष्ट विवेक,

      अहंकार बस  छोड़ दो, यह  सलाह है नेक l

 

             धैर्य, धर्म , निर्भीकता, सभी  बुलाएँ  पास,

            त्यागें यदि हम भीरुता, बने परिस्थिति दास l

 

Wednesday, 17 January 2024

 

 मन में यदि इच्छा प्रबल, करते रहें प्रयास,

        साहस  बाँधे पाँव  में,  रहे  सफलता दास l

 

             यही नर्क के द्वार  हैं, लोभ, मोह, अरु काम,

             विजय पा सका जो कभी, जग में पाया नाम l