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भोजन,पानी,शूद्ध वायु से, तन का होता
पूर्ण विकास,
श्रेष्ठ विचारों
से प्रसन्न मन, पहुँच सके ईश्वर के पास |
चिन्तन, मनन, स्वाध्याय से, ज्ञान गुणी संग
प्राप्त करें,
मिले प्रेरणा
शुभ कर्मो की, प्रभु मिल जाते यह विश्वास|
अगर रहेगी मन में विकृति, नहीं शान्ति पा सकते,
जंगल और गुफा
में है वह, भ्रम है, तुमसे कहते |
अन्तस् मन में
उसे खोजिये, त्यागो मन दुर्बलता,
अंहकार बाधक बनता है, यह क्यों नहीं
समझते |
अगर रहेगी मन
में विकृति, नहीं शान्ति पा सकते,
जंगल और गुफा
में है वह, भ्रम है, तुमसे कहते |
अन्तस् मन में
उसे खोजिये, त्यागो मन दुर्बलता,
अंहकार बाधक बनता है, यह क्यों नहीं
समझते |
प्राणी ने मन जीत लिया तो, जग को भी वह जीत जायगा,
दृढ़ संकल्प सामने रक्खो, तो विचार
भी स्वस्थ आयगा |
अगर वासना मन
में जागे, मन पर करो नियन्त्रण तो फिर,
मन को तुम एकाग्र करो तो, उसका तो फल रंग लायेगा
|
जग को भी वह जीत जायगा,
दृढ़ संकल्प सामने रक्खो, तो विचार
भी स्वस्थ आयगा |
अगर वासना मन
में जागे, मन पर करो नियन्त्रण तो फिर,
मन को तुम
एकाग्र करो तो, उसका तो फल रंग लायेगा |v
प्राणी ने मन
जीत लिया तो, जग को भी वह जीत जायगा,
दृढ़ संकल्प सामने रक्खो, तो विचार
भी स्वस्थ आयगा |
अगर वासना मन
में जागे, मन पर करो नियन्त्रण तो फिर,
मन को तुम
एकाग्र करो तो, उसका तो फल रंग लायेगा |
हम समाज के ही सेवक हैं, यही तो है अपनी पहिचान,
रहें संगठित,उत्साहित हों, इसी से बढ़ता
अपना मान |
दीनों के प्रति
रहें समर्पित, पर उपकारी रहें हमेशा,
पालन करें श्रेष्ठ नियमों का, बनाएं ऐसा नया विधान
हम समाज के ही सेवक हैं,
यही तो है अपनी पहिचान,
रहें संगठित,उत्साहित हों, इसी से बढ़ता
अपना मान |
दीनों के प्रति
रहें समर्पित, पर उपकारी रहें हमेशा,
पालन करें
श्रेष्ठ नियमों का, बनाएं ऐसा नया
विधान |
हम समाज के ही
सेवक हैं, यही तो है अपनी पहिचान,
रहें संगठित,उत्साहित हों, इसी से बढ़ता
अपना मान |
दीनों के प्रति
रहें समर्पित, पर उपकारी रहें हमेशा,
पालन करें
श्रेष्ठ नियमों का, बनाएं ऐसा नया
विधान |