पढ़ कर,गुन कर, गुण दोषों की करें समीक्षा,
समय पड़े पर आवश्यक उत्तीर्ण परीक्षा,
लेकिन इतना धीरज रक्खें शांत भाव से,
फल पाने को करना पड़ती सदा प्रतीक्षा l
कागज पर ही लुप्त हो गये, सारे वादे ,
और सामने केवल इनके गलत इरादे,
आदर्शों की कसमें इनकी सभा मंच तक,
अंतर मन काले हैं,ऊपर सीधे साधे l
लिये सस्नेह हाथों में,
लगाओ प्रेम का टीका,
जला कर बैर होली में,
बढाओ प्रीति पावन तुम |
बढ़ें नजदीकियाँ हम में,
रहे उत्साह सबके मन,
खिलें चेहरे, प्रफुल्लित मन,
भुला दें भेद सारे हम |
नहीं शिकवे शिकायत हों,
गले मिल जाँय हम सबसे,
विनय है ईश से मेरी,
हमें सद बुद्धि ऐसी दे
सदाचार संग नम्रता, क्षमा,दया का भाव,
सत्य,शील संग प्रेम है, रहता नहीं अभाव |
ज्ञान सहज पायें सभी, रहें अगर निश्चिन्त,
अंहकार बस छोड़ दें, झूठे सभी लगाव |
जग प्रकाशित है सदा आदित्य से,
हम प्रगति करते सदा सानिध्य से,
कोई माने, या न माने सत्य है,
देश जाग्रत है सदा साहित्य से l
केवल तन ही नहीं आपका मन पवित्र हो,
आत्म नियंत्रण, परोपकार उत्तम चरित्र हो,
सुख के साथी नहीं दुःख में साथ निभायें
बस जिनके आचरण श्रेष्ठ हों वही मित्र हो |
केवल मनोरंजन नहीं कवि धर्म है,
साहित्य दे कुछ प्रेरणा कवि कर्म है |
कर्तव्य पथ पर कवि चले, यह सोच ले,
सम्मान पायेगा सदा यह मर्म है |
जब प्रताड़ित हो कभी संघर्ष में,
या निराशा हो खड़ी उत्कर्ष में,
हर विफलता से न विचलित हो कभी,
तो सफलता भी मिले अपकर्ष में |
महिलादिवस है आज, यह आता रहा प्रति वर्ष है, आकाश को छू लो, रहे आदर्श तो बस हर्ष है, यदि प्रदर्शन, या उपभोग के ही लिए नारी बनी, तो समझ लेना, इस लड़ाई में अधिक संघर्ष है |
सेवा भाव समर्पण ही बस, मानव की पहिचान है,
जिसको है सन्तोष हृदय में, सच में वह धनवान है l
यों तो मरते,और जन्मते,जो भी आया यहाँ धरा पर,
करता जो उपकार सदा ही, पाता वह सम्मान है |