Saturday, 11 January 2020

आशिंयाँ अपना जला कर,


आशियाँ अपना जला कर, कोनसा बदला लिया,           
दोस्त, दुश्मन का फरक तो,अब नजर आता नहीं l
               जेवरों  को क्या दिखाएँ, अब  मुलम्मा  है चढ़ा,
               जिन्स असली है या नकली,अब समझ आता नहीं l                     लूट लें अस्मत किसी की,या करे कोई गुनाह,
पाक  दामन  ही बताएं, कोई  पछताता नही l
                बेबफाई  हर  कदम  पर ,नाम  केवल  बाबफा,
                राह लम्बी  है डगर  की, कोई चल पाता  नहीं l
पीठ पर ही वार करके, दोस्त बनते सामने,
दर्द कितना है जखम में, कोई सहलाता नहीं l





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