Wednesday, 31 December 2025

इन्द्रिय सुख को त्याग दे, मन पर लगा लगाम,

            फिर देखो परिणाम  तुम, अन्तरमन  में  राम |

 

                    बिना चाहना के भजो, बिना किये विश्राम,

                    अनचाहे मिल जाँयगे, तुमको प्रभु श्री राम | 

Tuesday, 30 December 2025

 

 चलते फिरते भी भजो, मन ही मन श्री राम,

            बिगड़ेगा कुछ  भी  नहीं, बन जाते  हैं काम l

 

                              राम नाम में  शक्ति है, बिगड़े बनते  काम,

                   मैं ऐसा  ही  मानता,  भजता  आठों  याम |

Monday, 29 December 2025

                                राम,राम,जय राम जी, राम राम भज राम,

                              राम  राम  भजते  रहो, यदि  चाहो  आराम l

 

             मन में  हों श्री राम जी, काम  करें सब राम,

             हर क्षण हो बस राममय, बिना किये विश्राम l

Sunday, 28 December 2025

 

सिया राम मय जगत है,जन जन का आधार,

             मिथ्या सब  संसार  है, प्राणी  यह  है  सार l

 

                                 सखा हमारे राम हैं,वही पिता  हैं मात,

                               सबको शुभ आशीष की,देते हैं सोगात l

 

            सीता पति श्री राम हैं, लक्ष्मण उनके साथ,

            विघ्न स्वयम हरते वही, छाया करता हाथ l

 

Saturday, 27 December 2025

  चित्र राम का मन बसे, होगा हर्ष अपार,

           सिया राम  की छवि रहे, होगा बेड़ा पार l

 

                  राम कथा  अमृत कथा, विष  को करती दूर,

                 विषय वासना हट सके, यश मिलता भरपूर l

Friday, 26 December 2025

   माया मय संसार  है, जाग्रत होता मोह,

          राम  भजन से छूटता, कैसा भी हो द्रोह l

 

                          कमल नयन श्री राम की, छवि सुन्दर कमनीय,

                          पीताम्बर  धारण  करें, संग  में  उनके  सीय l

Thursday, 25 December 2025

 उलझा प्राणी मोह में, जीवन है संग्राम,

            वही जीत पाया इसे, जो भजते हैं राम l

 

                          राह  कटीली  बहुत है, पग पग पर अवरोध,

                            राम भजन से सुगम है, यह मेरा अनुरोध | 

Saturday, 20 December 2025

   बिना चाहना के भजो, बिना किये विश्राम,

                    अनचाहे मिल जाँयगे, तुमको प्रभु श्री राम |

 

             चित्र राम का मन बसे, होगा हर्ष अपार,

           सिया राम  की छवि रहे, होगा बेड़ा पार l

Friday, 19 December 2025

  

 समय मिल सके काम से, जिव्हा जप ले राम,

                   मन  प्रसन्न  होगा  सदा, ऐसा  उनका नाम |

 

            इन्द्रिय सुख को त्याग दे, मन पर लगा लगाम,

            फिर देखो परिणाम  तुम, अन्तरमन  में  राम |

Thursday, 18 December 2025

 

  जब भी संकट आ पड़े, मन  भज सीताराम,

              संकट  भी  कट जायगा, पहुँचो उनके धाम |

                 

                                    समय मिल सके काम से, जिव्हा जप ले राम,

                   मन  प्रसन्न  होगा  सदा, ऐसा  उनका नाम |

Wednesday, 17 December 2025

 

 चलते फिरते भी भजो, मन ही मन श्री राम,

            बिगड़ेगा कुछ  भी  नहीं, बन जाते  हैं काम l

 

                              राम नाम में  शक्ति है, बिगड़े बनते  काम,

                   मैं ऐसा  ही  मानता,  भजता  आठों  याम |

Tuesday, 16 December 2025

  मन में  हों श्री राम जी, काम  करें सब राम,

             हर क्षण हो बस राममय, बिना किये विश्राम l               

 

                         सारा जग  है  राममय, सभी जगह हैं राम,

                            मन निर्मल यदि आपका,तो बसते अभिराम l

Friday, 5 December 2025

   राम कथा  अमृत कथा, विष  को करती दूर,

                 विषय वासना हट सके, यश मिलता भरपूर               

 

         राम कथा जिसने लिखी,लिया राम का नाम,

              राम रंग  में  रंग गया, माया का क्या काम l

  

Thursday, 4 December 2025

  बिना चाहना के भजो, बिना किये विश्राम,

                    अनचाहे मिल जाँयगे, तुमको प्रभु श्री राम |

 

             चित्र राम का मन बसे, होगा हर्ष अपार,

           सिया राम  की छवि रहे, होगा बेड़ा पार l

Wednesday, 3 December 2025

 

जन्म तिथि ३दिसम्बर १९३६

जीवन का पल पल अब बीत रहा,

यह घट भी धीरे से रीत रहा |

जीवन में क्या मैंने पाया है,

सच पूँछो मधुमय संगीत रहा |

बचपन में न्यारा संसार रहा,

सबका ही लाड प्यार,स्नेह रहा |

सबसे आशीष वचन पाया था,

सच में  वह मेरा  नवनीत रहा |

खुली सी किताब रही बचपन की,

बांची पर किसने इस यौवन की |

बदली तो घिरती थी घुमड़ घुमड़,

बिन बरसे  रीत गईं  सावन की |

यौवन ने  जीवन  में  दर्द सहा,

सुख, दुख में सांझा व्यवहार रहा |

अनगिनते कामों  का  बोझ रहा,

संग  मगर  मेरे  मनमीत  रहा |

लोगों  ने  चाहा  मैं  मिट जाँऊ,

भँवर  में  किनारा  कैसे  पाँऊ |

मन्जिल थी  दूर मगर जाना था,

अपना  उद्देश्य  मुझे  पाना था |

उलझ  रहे  प्रश्नों  ने  घेर लिया,

अन्तिम  लड़ाई,  पर   जीत  रहा |

 

अब तो  सन्नाटा है  जीवन में,

फिर भी उत्साह भरूं जन जन में,

जीवन  में  बहुत   दूर जाना है,

शेष जो, सफलता  को  पाना है |

दूर  हुईं,   मेरी  कठनाईयां,

लगता है मेरा मन जीत रहा |

अभिलाषा  उससे बस  मिलने की,

कमल दल सौन्दर्य रूप खिलने की |

सोचा  है  अपना  सब  खो  जाँऊ,

अपने  आराध्य  को  मैं  पा जांऊ |

पूरी  कब  होती  हैं  इच्छायें,

अनसुलझे प्रश्न सा अतीत रहा |

तन का यह पंछी कब उड़ जाये,

जानेगा कौन? क्या  पकड़ पाये ?

भौतिक  इच्छायें, सब  पूरी  हैं,

साध  नहीं  कोई  जो  अधूरी है |

चढ़ लीं हैं मैंने सब ऊँचाईयां,

साथी बस, मेरा तो गीत रहा |

**************