Saturday, 18 January 2025

 

उद्घोषक, युगद्दष्टा, सृष्टा, जन जन की  पहिचान है,

स्वावलम्व, निर्देशक युग का, स्वर लय में सहगान है l

आजीवन निर्धन  रह कर  भी, सत्य रहा  है सम्बल,

इसीलिये युग युग से कवि को, मिला सदा सम्मान है l

Friday, 17 January 2025

 

गुण विशेष होता है कवि में,वह भरता गागर में सागर,

सरल प्रकृति का प्राणी जग में,करुणा का ही है आगर l

नहीं सत्य छोड़ा  है उसने, रही कल्पना साथ  उसी के,

इसीलिये कवि जिन्दा रहता, प्रतिभा होती सदा उजागर l

Thursday, 16 January 2025

 

राज तिलक जब सुना राम ने, तभी हुये वनवासी,

लक्ष्मण क्या पीछे रह सकते, बने  राम विश्वासी l

सीता कैसे  साथ  छोड़ती, सुख वैभव  को त्यागा,

सुन कर   राम गये हैं वन में, भरत बने सन्यासी l

Wednesday, 15 January 2025

 

देश, परिस्थिति और काल का, जिसको रहता ज्ञान,

साहस, शौर्य जगाने  का  ही, जो करता अभियान l

वैसे  तो वह सरल प्रकृति का, प्राणी है इस जग में

कवि मिटता है आन वान पर, यह उसकी पहिचान |

Tuesday, 14 January 2025

                                                        जो दिल में था, कागज पर उतारा कवि ने,

मिटे हये  हर  नक्श को  उभारा कवि ने.

इस संसार   को   श्री राम  ने सँवारा पर,

इस धरा पर श्री राम  को  सँवारा कवि ने.


Monday, 13 January 2025

 

                                           बच कर  हम  सबको रहना है, खोद रहे  जो  खाई,

भारत माँ  के  हम सपूत हैं, आपस में  हम हैं भाई l

हिन्दू को मस्जिद प्यारी है, मुसलमान को हर मन्दिर,

मत  बांटो, हम भारत वासी,  हिन्दू मुसलमान ईसाई l

 

 

राज तिलक जब सुना राम ने, तभी हुये वनवासी,

लक्ष्मण क्या पीछे रह सकते, बने  राम विश्वासी l

सीता कैसे  साथ  छोड़ती, सुख वैभव  को त्यागा,

सुन कर   राम गये हैं वन में, भरत बने सन्यासी l

 

Sunday, 12 January 2025

 

ऊँचा  हो  आदर्श हमारा, लोग  करेंगे  तभी  अनुकरण,

सत्य अहिंसा को अपनाएँ, सारा जग कर सके अनुशरण l

द्वेष, दम्भ या अहंकार से, जीत सका क्या कोई मन को,

निष्ठा, लगन, परिश्रम का ही, फल होता है श्रेष्ठ आचरण l

Saturday, 11 January 2025

 

समझी जिसने खुद की गलती, वह पानी पानी हो जाता,

जब भी ह्रदय द्रवित होता तो, आँखों में पानी भर आता l

आँखों का  पानी मर जाता, आँखों से जो भी गिर जाता,

बुन्देलखण्ड  का  पानी है, जो  हरदम पानीदार कहाता l

Friday, 10 January 2025

 

भूखा  न  सोये  कोई  तो  उसका  नसीब है,

सेवा  में  रहे  तत्पर  खुदा  के  करीब है l

कितना भी हो अमीर यदि दौलत की भूख है,

परहित नहीं  है  सोच, तो सच  में गरीब है l

Thursday, 9 January 2025

 

हो नीर क्षीर विवेक  पावन ध्येय है,

“युग चेतना” हो तो सफल उद्देश्य है l

सद बीज  से  अंकुरित  वटवक्ष की,

उपलब्धि का परिणाम का ही श्रेय  है l

Wednesday, 8 January 2025

 

जिनके  जितने  झूठे  वादे, उनके  माथे  रोली  चन्दन,

लिप्त रहे जो गलत काम में, उनका द्वार द्वार अभिनन्दन l

जब अतीत  की  बात सोचता, ठनका  करता  सबका माथा,

अँधियारा जिनका भविष्य  है, वर्तमान  करता गुणवन्दन l