Tuesday, 9 September 2025

 

दीनों  की  पीड़ा हरें, उससे  हो  पहिचान,

सुख समृद्धि ही बढ़ सके, उसमें है कल्याण l

कान  दूसरा क्यों सुने, आँख बने अनजान,

निर्बल, निर्धन न रहे, यही सुकृत का दान l

Monday, 8 September 2025

 

अकर्मण्य  जो  भी  होते हैं ,उनको विपदाओं ने घेरा,

मुर्गा होता नहीं  गाँव में, तो  क्या  होता नहीं सबेरा l

कर्म प्रधान मानते जो भी, वे ही लक्ष्य प्राप्त कर पाते,

भाग्य भरोसे जो  भी  रहते, उनका जीवन रहा अँधेरा l

Sunday, 7 September 2025

 

योग्यता नहीं आज, पद ही मापदण्ड है,

अतीत सामान्य, पर वर्तमान प्रचण्ड है l

भावना  मन्दिर में, मूर्तियों  में भेद रहे,

तो,गौरव,प्रतिष्ठा,सम्मान खण्ड खण्ड है l

Thursday, 28 August 2025

 

श्रमित समय का अंशदान जिनका है जीवन,

सहभागी  हो कष्टों में, जो  हैं पीड़ित जन l

सब  में  हो  सदभाव, साधना ऐसी करिये,

तभी आपको  हो  सकता  है, ईश्वर  दर्शन l

Wednesday, 27 August 2025

 

जो सेवक  हैं  सही अर्थ में, वे  तो  समझें  खुद को अफसर,

वेतन भोगी  कहें  भले  ही, छोड़ें नहीं  कोई  भी  अवसर l

जनहित के क्या काम करेंगे, सोच समझ जिनकी है लिप्सा,

समय नहीं  जो  दर्द  सुन सकें, ऐसा  ही  होता है अक्सर |

Tuesday, 26 August 2025

 

कर भला, होगा भला, यह बात मुद्दत से पढ़ी,

 अब   बुराई  में  भलाई, ढूढ़ते   सबसे  बड़ी l

केवल भरोसा राम का, यह युक्ति ही बेकार है,

यदि सफलता चाहते तो,फिर करो मेहनत कड़ी l

Saturday, 23 August 2025

 

रहा  उपेक्षित वही वर्ग  ही, जो नेत्रत्व दिया करता है,

अधिकारों के साथ साथ ही, जो कर्तव्य किया करता है l

आज समय ने करवट बदली, पीड़ा और बढ़ा दी मन की,

प्यास बुझाये जो औरों की, वह अपमान पिया करता है l

Friday, 22 August 2025

 

लज्जा,शील,सनेह, यही तो नारी के आभूषण,

निज का जो व्यक्तित्व, सदा से ही  है दर्पण l

चन्चल  और चपलता  को  उन्माद  कहा है

सहज सरलता  प्रेम रहा  उसका  आकर्षण l

Thursday, 21 August 2025

 

सघन वृक्ष ही सदा उखड़ते, वेत सलामत सदा  रही  है,

सहज नम्रता और समर्पण, कारण बनता बात सही है l

पर्वत को भी चीर सकी  है, सरिता अपनी राह बनाती,

अहंकार को तजो,सफलता मिलती है, यह बात कही है l

Wednesday, 20 August 2025

 

सृष्टि क्रम से जो जुड़ा, वह है पुरातन,

साध्य से  कैसे जुड़े, हों नित्य साधन l

धर्म मत  बाँटो, नया  है  या  पुराना,

नित्य नूतन सत्य  ही  होता सनातन l

Tuesday, 19 August 2025

 

श्रमित समय का अंशदान जिनका है जीवन,

सहभागी  हो कष्टों में, जो  हैं पीड़ित जन l

सब  में  हो  सदभाव, साधना ऐसी करिये,

तभी आपको  हो  सकता  है, उसका दर्शन l