Wednesday, 12 November 2025

 

 

काम सभी  हों  राम संग, पूजा हो निष्काम,

राम नाम हो उच्चरित, मुख से आठों याम l

              मुख से निकले राम ही, रहें सदा वे पास,

             सबके रक्षक राम हैं, मन में रख विश्वास l 

Tuesday, 11 November 2025

 

 

 

काम सभी  हों  राम संग, पूजा हो निष्काम,

राम नाम हो उच्चरित, मुख से आठों याम l

              मुख से निकले राम ही, रहें सदा वे पास,

             सबके रक्षक राम हैं, मन में रख विश्वास l

Monday, 10 November 2025

 

मुख से निकले राम ही, बिना किये विश्राम,    

सुख से बीते जिन्दगी, मिल जाये  आराम l

   

                 अगर कामना मोक्ष  की, या चाहो सुरधाम,

               वह तुमको मिल जायगा, प्राणी जप तू राम l

 

मुख से निकले राम ही, बिना किये विश्राम,    

सुख से बीते जिन्दगी, मिल जाये  आराम l

   

                 अगर कामना मोक्ष  की, या चाहो सुरधाम,

               वह तुमको मिल जायगा, प्राणी जप तू राम l

Sunday, 9 November 2025

 

मरा  मरा जप  कर  हुये, वाल्मीक विद्वान,

राम नाम यदि तुम जपो, मिल जाएँ भगवान l

 

                 राम संग  हैं  आपके, जितना है विश्वास,

                   जितने उसके पास जो, वह उतने ही पास |

Saturday, 8 November 2025

 

इष्ट सभी  के ऐक हैं, विविध उन्हीं के नाम,

      लेकिन मुझको प्रिय लगा, दशरथ नन्दन राम l

        

                 राम नाम इक मन्त्र है, इसे जपो दिन रैन,

                     बाधाएँ  कट  जांयगी, तुम्हें  मिलेगा चैन l

Friday, 7 November 2025

 

राजनीति   ईमान,

छलबल है दिनमान.

सीखो तुम,अन्यथा,

क्षमा करो श्री मान.

 

Thursday, 6 November 2025

 

दया दिखाओ दीनों के प्रति, तभी याद तुम आ सकते हो,

भला करो जग में रह प्राणी, तभी लाभ तुम पा सकते हो.

र व को जो भी याद करेगा, उससे वह  वर पा  जायेगा,

सच्चे मन से मरा कहो तो, सदा राम मन भा सकते हो.

Wednesday, 5 November 2025

 

छोटी वहर में==  जो माया के दास, वही रहते उदास .

                           माया छोडो ख़ास, रहे आपके पास. |

Tuesday, 4 November 2025

                                                            शब्द को उल्टा करें ===

दया दिखाओ याद आवगे,

भला करो तो लाभ पावगे.

रव से तो वर सब पाते हैं,

मरा कहो तो राम गावगे.

शब्द को उल्टा करें ===

दया दिखाओ याद आवगे,

भला करो तो लाभ पावगे.

रव से तो वर सब पाते हैं,

मरा कहो तो राम गावगे.

Monday, 3 November 2025

 

अब तक मोह प्रेम वश हो कर जी ललचाया,

झूठे  रिश्ते नाते  जग  में, यह  ही  पाया.

उसने कब चाहा तुम उनको  धन दौलत दो,

केवल दुख में साथ निभा दो, यह ही भाया.

Friday, 31 October 2025

 

भाव हैं  उदिग्न मन की  ही तपन,

साधना स्वर ही रहा संगीत का धन.

लय अगर बस छन्द का श्रृंगार कर दे,

गीत क्या  है  सृष्टि का  नूतन सृजन.

Thursday, 30 October 2025

 

धर्म  ओढ़े  ढोंग  का  ही  आवरण,

अर्थ है निज स्वार्थ  मे  अंत:करण |

मोक्ष को तुमही बतादो क्या कहें हम,

काम का जब  कर रहे हम अनुशरण.

Wednesday, 29 October 2025

 

सत्य क्या है, झूठ  का पृष्ठावरण,

कर्म है जब स्वार्थ का ही आचरण.

लोभ  ने  अपना बढाया कद यहाँ,

क्रोध का  क्या कर सकेंगे संवरण.

 

Tuesday, 28 October 2025

 

उपवन का हर पौधा सींचा, और सँभाली उसकी काया,

फल देने का मौका जब था, तो अपनों ने ही विसराया.

मतलब के सब साथी होते, सेवा से क्या उनका नाता

चलता आया आदि काल से, ऐसी ही है उसकी माया,

Monday, 27 October 2025

मीठी बातें  बगल  छुरी कायही  अर्थ है,

मिले  अनादर, तिरिस्कार होता अनर्थ है.

घुटनों के बल चले,किसी को वह ललकारे,

                                                   बन्दर घुड़की सुनी, सोच लो सभी व्यर्थ है. 

Sunday, 26 October 2025

                                              बिन सत्संग विवेक नहीं  हो, ऐसा कथन सटीक  रहा है,

इसीलिये सत्संग करो तुम, “ज्ञान बिना गुरु” यही कहा है.

वह ही  मार्ग प्रदर्शक  बन कर, सीधी सच्ची राह दिखाता,

गुरु का उपदेशामृत पाकर, बिन प्रयास ही प्रभु मिल जाता.

 

उ