काम सभी हों राम संग, पूजा हो निष्काम,
राम नाम हो उच्चरित, मुख से आठों याम l
मुख से निकले राम ही, रहें सदा वे पास,
सबके रक्षक राम हैं, मन में रख विश्वास l
मुख से निकले राम ही, बिना किये विश्राम,
सुख से बीते जिन्दगी, मिल जाये आराम l
अगर कामना मोक्ष की, या चाहो सुरधाम,
वह तुमको मिल जायगा, प्राणी जप तू राम l
मरा मरा जप कर हुये, वाल्मीक विद्वान,
राम नाम यदि तुम जपो, मिल जाएँ भगवान l
राम संग हैं आपके, जितना है विश्वास,
जितने उसके पास जो, वह उतने ही पास |
इष्ट सभी के ऐक हैं, विविध उन्हीं के नाम,
लेकिन मुझको प्रिय लगा, दशरथ नन्दन राम l
राम नाम इक मन्त्र है, इसे जपो दिन रैन,
बाधाएँ कट जांयगी, तुम्हें मिलेगा चैन l
राजनीति ईमान,
छलबल है दिनमान.
सीखो तुम,अन्यथा,
क्षमा करो श्री मान.
दया दिखाओ दीनों के प्रति, तभी याद तुम आ सकते हो,
भला करो जग में रह प्राणी, तभी लाभ तुम पा सकते हो.
र व को जो भी याद करेगा, उससे वह वर पा जायेगा,
सच्चे मन से मरा कहो तो, सदा राम मन भा सकते हो.
छोटी वहर में== जो माया के दास, वही रहते उदास .
माया छोडो ख़ास, रहे आपके पास. |
शब्द को उल्टा करें ===
दया दिखाओ याद आवगे,
भला करो तो लाभ पावगे.
रव से तो वर सब पाते हैं,
मरा कहो तो राम गावगे.
अब तक मोह प्रेम वश हो कर जी ललचाया,
झूठे रिश्ते नाते जग में, यह ही पाया.
उसने कब चाहा तुम उनको धन दौलत दो,
केवल दुख में साथ निभा दो, यह ही भाया.
भाव हैं उदिग्न मन की ही तपन,
साधना स्वर ही रहा संगीत का धन.
लय अगर बस छन्द का श्रृंगार कर दे,
गीत क्या है सृष्टि का नूतन सृजन.
धर्म ओढ़े ढोंग का ही आवरण,
अर्थ है निज स्वार्थ मे अंत:करण |
मोक्ष को तुमही बतादो क्या कहें हम,
काम का जब कर रहे हम अनुशरण.
सत्य क्या है, झूठ का पृष्ठावरण,
कर्म है जब स्वार्थ का ही आचरण.
लोभ ने अपना बढाया कद यहाँ,
क्रोध का क्या कर सकेंगे संवरण.
उपवन का हर पौधा सींचा, और सँभाली उसकी काया,
फल देने का मौका जब था, तो अपनों ने ही विसराया.
मतलब के सब साथी होते, सेवा से क्या उनका नाता
चलता आया आदि काल से, ऐसी ही है उसकी माया,
मीठी बातें बगल छुरी कायही अर्थ है,
मिले अनादर, तिरिस्कार होता अनर्थ है.
घुटनों के बल चले,किसी को वह ललकारे,
बन्दर घुड़की सुनी, सोच लो सभी व्यर्थ है.
बिन सत्संग विवेक नहीं हो, ऐसा कथन सटीक रहा है,
इसीलिये सत्संग करो तुम, “ज्ञान बिना गुरु” यही कहा है.
वह ही मार्ग प्रदर्शक बन कर, सीधी सच्ची राह दिखाता,
गुरु का उपदेशामृत पाकर, बिन प्रयास ही प्रभु मिल जाता.