Tuesday, 7 January 2025

 

ईश्वर के  द्वारा ही  सब  सम्पादित होता है ,

लेकिन पौरुष मेरा  नहीं  विवादित  होता  है l

रटे हुये को पढना क्या, कुछ नया करें हम भी,

तो  उत्साहित जीवन  भी, आनन्दित  होता है l

 

Monday, 6 January 2025

 

             

                  जिसमें कभी बहार न आये,ऐसा मधुवन भी क्या मधुवन                                                                             

                  अगर न अन्तर्मन ही महके,ऐसा चन्दन भी क्या चन्दन l

                 यों तो करता रहा सभी का,बार बार मैं ही अभिनन्दन,

                   यदि मेरे आराध्य न रीझें,ऐसा वन्दन भी क्या वन्दन |

Sunday, 5 January 2025

ऊँचा  हो  आदर्श हमारा, लोग  करेंगे  तभी  अनुकरण,

सत्य अहिंसा को अपनाएँ, सारा जग कर सके अनुशरण l

द्वेष, दम्भ या अहंकार से, जीत सका क्या कोई मन को,

                                             निष्ठा, लगन, परिश्रम का ही, फल होता है श्रेष्ठ आचरण l 

Saturday, 4 January 2025

 

सभी चाहते सदा करें  सब, उनकी ही अनुशंसा,

उनको  चाटुकार  ही  घेरें, रहती  ऐसी  मंशा l

हर बुराई पर  परदा डालें, गाएं  सब गुणगाथा,

सदा भली लगती है सबको, अपनी आत्म प्रशंशा l

Friday, 3 January 2025

 

गीत में  बस कल्पना साकार हो जाये,

जीत में  बस साधना स्वीकार हो जाये l

हम बदल सकते यहाँ इतिहास के पन्ने,

प्रीत में  बस वासना यदि क्षार हो जाये l

Thursday, 2 January 2025

 

सत्साहित्य  सदा कवि लिखता, चाटुकारिता  नहीं धर्म है,

वह उपदेशक है समाज का. सच में उसका यही कर्म है l

परिवर्तन लाना  समाज में, स्वाभाविक  वाधाएं  आयें,

कार्य कुशलता के ही कारण, सम्मानित है यही मर्म है l

 

Wednesday, 1 January 2025

 

नया वर्ष

आया है नया वर्ष, करते हम अभिनन्दन,

हम से जो अग्रज हैं, उनका करते वन्दन।

छोटों को शुभाशीष, मंगलमय हो जीवन।

 

प्रेम सदाफूले बस, हम सब उत्साही हों,

प्रगति मार्ग जो भी हो, उस पथ के राही हों,

हम उँचाई छू  लेंगे, नित प्रयास हों नूतन ।

 

                                                  गत से शिक्षा ले कर, देखें हम आगत को,

  उत्सुक है नव प्रभात,हम सबके स्वागत को।

शुभ चिन्तक जो भी हैं, देखें हम अपनापन,

आया है नया वर्ष, करते हम अभिनन्दन।

 

जग में प्रसिद्धि के कीर्तिमान तोड़े हम,

भर दें उजयारे को, छूट जाये सारा तम।

मिट जाये अहंभाव, धुल जाये अन्तरमन।

 

द्वेष, बैर भूलें सब, छोटों को अपनायें,

प्रेम बीज बो कर हम,बगिया को महकायें।

मन मन्दिर अपने ही, बन जायें वृन्दावन।

 

ज्ञानवान, बुद्धिमान,प्रभा ओजस्वी हों,

शरदं शतं जीवेत, आप सब यशस्वी हों।

विनती है प्रभु से बस, बन जायें वे साधन।

 

उत्तर से दक्षिण तक,हिन्दी सब की भाषा,

पूरबसे पश्चिम तक, सुदृढ़ रहे यह आशा।

हिन्दी की प्रगति हेतु, जुट जायें ज्ञानी जन। आया है नया वर्ष,