Wednesday, 11 December 2024

 

नेताओं   की चरण वन्दना, या अभिनन्दन,

उसका यह परिणाम,आज जनजन में क्रन्दन l

                            कुछ  तो  त्याग हमें बढ़ करके करना होगा, 

ले लें  हम  संकल्प, अगर करना  परिवर्तन l

Tuesday, 10 December 2024

                                                                 कथन नहीं चिन्तन पवित्र हो,

चित्र नहीं, उज्ज्वल चरित्र हो.

चापलूस तो  मिल सकते पर,

सदा साथ  दे, वही  मित्र हो.|

Monday, 9 December 2024

                                                             घटाना चाहते  हो, बोझ  मन  का,

सुगन्धित हो,खिले मन के सुमन का l

सुनो, फिर तुम करो विश्वास मन में,

सरल  सा रास्ता श्रृद्धा नमन  का l

 

      

Sunday, 8 December 2024

 

सरकारी सम्पत्ति  तोडना, किसी तरह  की  क्षति पहुँचाना,

नियम विरुध्य हो गया यह सब, जनता को ही यह अपनाना |

उसी व्यक्ति या उसके दल को, क्षति पूर्ति अब करना होगी,

दण्डित होंगे, जेल जाँयगे,  मुश्किल होगा अब  बच पाना |

Saturday, 7 December 2024

 

तुम करो मेहनत अभी से, लक्ष्य हो परहित तुम्हारा,

देश की  हो  सहज सेवा,  धर्म  होता  है  हमारा |

एक जुट हो कर  करेंगे, फल तभी  हमको मिलेगा,

है यही उद्देश्य सबका, हो,  प्रगति  ढूढें  किनारा |

Friday, 6 December 2024

 

बीते युग को छोड़, नये युग का निर्मार्ण करो,

आने वाले कल का तुम बढ़ कर सम्मान करो l

बीती   ताहि विसारो  का  सिद्धान्त हमारा,

किन्तु नहीं हम गत को भूलें,उसका मान करो l

Thursday, 5 December 2024

नभचर,जलचर, जब खेमों में नहीं बंटे हैं,

थलचर प्राणी क्यों आपस में लडें कटे हैं,

हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,

मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं

 नभचर,जलचर, जब खेमों में नहीं बंटे हैं,

थलचर प्राणी क्यों आपस में लडें कटे हैं,

हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,

मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं

 नभचर,जलचर, जब खेमों में नहीं बंटे हैं,

थलचर प्राणी क्यों आपस में लडें कटे हैं,

हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,

मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं

 नभचर,जलचर, जब खेमों में नहीं बंटे हैं,

थलचर प्राणी क्यों आपस में लडें कटे हैं,

हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,

मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं

 नभचर,जलचर, जब खेमों में नहीं बंटे हैं,

थलचर प्राणी क्यों आपस में लडें कटे हैं,

हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,

मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं

                           नभचर,जलचर, जब खेमों में नहीं बंटे हैं,

थलचर प्राणी क्यों आपस में लडें कटे हैं,

हम में हो सदभाव, सियासी दांव न खेलें,

मिल कर रहना सीख सकें हर जगह डटे हैं

                           

                           

 

  

Wednesday, 4 December 2024

 

जग में क्या खोया क्या पाया, इसका हिसाब है,

खुला हुआ  पन्ना जीवन  का, ऐसी  किताब है l

समय  पड़े  उत्थान, पतन, संघर्ष सदा होता  |

पर प्रसन्न  हर हालत  में  हूँ, यह स्वभाव  है l

Tuesday, 3 December 2024

                                                       तोता खाता  मिर्च, बोलता  मीठी  वाणी,

खाता  चीनी, मगर  बोलता कडुआ प्राणी l

झूठ, फरेब, प्रपंच, सदा  रहता  आकांक्षी,

स्वांग रचे वह, जगत कहे उसको कल्याणी l


Monday, 2 December 2024

                                                               बढ़ते कदम नहीं रुकना है,

कठिन उंचाई  भी चढना है l

अथक परिश्रम के ही बल पर,

                                                  नभ को भी  नीचे झुकना है l                           

Sunday, 1 December 2024

                                                 जिसकी बुद्धि प्रखर होती है,वही व्यक्ति मेधावी होता,

मेधावी  ही  आगे  बढ़  कर, प्रज्ञावान प्रभावी  होता l

अगर विवेकी बनना है तो, बस सत्संग सदा आवश्यक,

गुणी, पारखी और विवेकी, वह  ही प्रतिभा शाली होता l