Friday, 4 April 2025

मन में जब भी दूरी बढती, तो उसका परिणाम कलह है,

तिरिस्कार जब भी मिलता है, उसकी कोई रही बजह है |

माना यह  सबको समझोते, करना पड़ते  हैं  जीवन में,

                                         इनसे जो ऊपर उठ जाता, उसकी अपनी स्वयम जगह है | 

Thursday, 3 April 2025

 

जीवन जिनका दीन, मित्र या बन्धु समर्पित,

उनका जीवन सफल, जिया जो ओरों के हित |

बिन साधन  जो रहे, साधनारत जीवन  भर,

श्रृद्धांजलि अर्पित, अब उनको हम संकल्पित |

 

Wednesday, 2 April 2025

वृक्ष मौन पर सदा शान्ति के फल उगते हैं,

जो  होते  वाचाल, कलह  उनके  फलते हैं |

जो सुन्दर हो, वही श्रेष्ठ हो, आवश्यक क्या ?

                                                   लेकिन  जो  हो श्रेष्ठ, वही सुन्दर लगते हैं | 

Tuesday, 1 April 2025

 

परछाईं   के पीछे भागो, नहीं  पकड़  में  आये,

उसे छोड़  कर  आगे जाओ, तो  वह  पीछे धाये|

माया, ममता, और तृषा  का  यही हाल है मानो,

उसके प्रति बस मोह छोड़ दो, मन आनन्द समाये |

 

मन में बस जाग्रत करना है,उच्च भावना,

कठिन परिश्रम से ही मिलती है सराहना |

उसके संग संग ईश कृपा भी है आवश्यक,

सदा तपस्या  से  ही होती  पूर्ण साधना |

 

योग्य हितेषी मित्र मिल सकें, कम होता है,

औषधि गुण कारी, मीठी हो, कम होता है|

स्वार्थ सिद्धि में ही डूबे  हैं, प्राणी जग के,

अपनापन  कोई  दिखलाये, कम  होता है |

 

विद्वान से शोभा सभा की, बात यह सब जानते,

वृद्ध सम्मानित सभा में, बात यह  सब  मानते |

है कथन यह बुद्धिमानों का, नहीं जाना उचित है,

जो, आप में क्षमता, कुशलता को  नहीं पहिचानते |

 

 

Monday, 31 March 2025

 

यश अपयश विधि हाथ, सोच जो व्यक्ति जिया करते हैं,

हानि लाभ  को  छोड़, व्यक्ति  कर्तव्य  किया करते हैं |

जीवन  या   फिर  मरण सदा  से, उसके  हाथ रहा है,

सुख दुख   में समभाव, वही   अमरत्व पिया  करते हैं |

Sunday, 30 March 2025

 

सफल  रहे  यद्देश्य  पूर्ण  कर्तव्य   तुम्हारा,

                                                 प्रगति पन्थ पर  सदा बढ़े अस्तित्व तुम्हारा |

कर्म  योग  से  यदि  मानव  रिश्ता जोड़ेगा,

स्वयम प्रकाशित  हो जाये, व्यकित्त्व तुम्हारा |

Saturday, 29 March 2025

 

सफल  रहे  यद्देश्य  पूर्ण  कर्तव्य   तुम्हारा,

                                                 प्रगति पन्थ पर  सदा बढ़े अस्तित्व तुम्हारा |

कर्म  योग  से  यदि  मानव  रिश्ता जोड़ेगा,

स्वयम प्रकाशित  हो जाये, व्यकित्त्व तुम्हारा |

Friday, 28 March 2025

 

योग्य हितेषी मित्र मिल सकें, कम होता है,

औषधि गुण कारी, मीठी हो,कम होता है|

स्वार्थ सिद्धि में ही डूबे  हैं, प्राणी जग के,

अपनापन कोई  दिखलाये, कम होता है |

Thursday, 27 March 2025

 

                                                  मन में बस जाग्रत करना है,उच्च भावना,

कठिन परिश्रम से ही मिलती है सराहना |

उसके संग संग ईश कृपा भी है आवश्यक,

सदा तपस्या  से  ही होती  पूर्ण साधना |

 

Wednesday, 26 March 2025

        बहता पानी स्वच्छ  औरर निर्मल होता है,

         आगे बढने  का प्रयास  प्रतिपल  होता है |
        
 सागर कब किसको मिठास दे पाया जग में 
        
 ठहरे पानी  में  अक्सर  दलदल होता है |

Tuesday, 25 March 2025

 

फल देतें  हैं  सदा सभी को, वृक्ष नहीं कुछ खाते,

धरती   को सिंचित करते ही,बादल फिर उड़ जाते |

प्यास बुझाती प्यासे की ही, सरिता लब जल पीती,

पर  उपकारी  जो  होते  हैं, धन्य  वही  हो पाते |