Sunday, 18 August 2024

 

भृष्टाचार  मिटाना  हमको, यह  ले लें  संकल्प,

हर कीमत पर  इसे  हटाना, कोई  नहीं विकल्प,

कोढ़ सरीखा  है  यह जग  में, नहीं इसे पनपायें,

अधिक बढ़ गया तो फिर सोचो,होगा कोई प्रकल्प ?l

 

Saturday, 17 August 2024

वृक्ष मौन पर सदा शान्ति के फल उगते हैं,

जो  होते  वाचाल,कलह  उनके  फलते हैं l

जो सुन्दर हो,वही श्रेष्ठ हो,आवश्यक क्या ?

                                                  लेकिन  जो  हो श्रेष्ठ, वही सुन्दर लगते हैं l 

Friday, 16 August 2024

 

हम सुधरेंगे, जग  सुधरेगा, यही  बात  है  शास्वत,

दृष्टिकोंण बदलें हम अपना, इस में है अपना  हित |

गुण अन्वेषण हो स्वभाव में, हम समाज में  जाएँ,

घृणा, द्वेष, दुर्भाव त्याग कर, खुद को करें समर्पित |

 

हमको क्या करना है जग में, लक्ष्य बनाओ निश्चित,

जीना,मरना तो  जीवन क्रम,भटके, हुये  पराजित |

आये हैं  किस हेतु  धरा पर, इस पर  करिये मंथन |

व्यर्थ जायगा यह जीवन ही, फिर क्या मिले कदाचित |

 

चढ्ना है  पहाड़  के ऊपर, झुक  कर चढना होगा,

अगर चाहते मन्जिल पाना, रुक कर  चलना होगा |

अकड दिखा कर जो भी चलता, ठोकर खा गिर जाता,

लक्ष्य प्राप्ति हित,हो प्रयास रत, गिर कर उठाना होगा |

 

लक्ष्य  सामने  रखने  वाले, कभी  नहीं  रुकते हैं

जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं

धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य  बनाओ निश्चित

Thursday, 15 August 2024

हम आजादी का यह पर्व कुछ ऐसे मनाएं,

जो शहीद हुए हैं उनकी स्मृति में गीत गाएँ |

संकल्प दिवस है आज, प्रण तो लेना होगा,

आतंक वाद की सभी बाधाएं जड़ से मिटायें |

  

Wednesday, 14 August 2024

चढ्ना है  पहाड़  के ऊपर, झुक  कर चढना होगा,

अगर चाहते मन्जिल पाना, रुक कर  चलना होगा |

अकड दिखा कर जो भी चलता, ठोकर खा गिर जाता,

                                          लक्ष्य प्राप्ति हित,हो प्रयास रत, गिर कर उठाना होगा | 

Tuesday, 13 August 2024

 

जब विपत्ति आती है सिर पर, मन में चिंता, शोक, निराशा,

जब सम्पति आती है घर में, ईर्ष्या, द्वेष, मान की आशा |

तृष्णा बढती  ही  जाती  है, संग्रह को ब्याकुल होता मन,

सुख मिलना दूभर हो  जाता, धूमिल होती  है  अभिलाषा |

Monday, 12 August 2024

बुद्धि,विवेकी पुरुषों की बातों को सुनता,

संग कभी पौराणिक आख्यानों को चुनता |

वही  सामने  आप सभी  के  मैं रखता हूँ,

                                                    साथ  कल्पना  के  ताने बानों को चुनता | 

Sunday, 11 August 2024

 तुलसीदास=

हिन्दी  के  साहित्य  में राम  रहे  हैं  पास,

उनके  चरणों  में  झुके धरती  औ  आकाश.

वे जीवित  हैं  आज, जियेंगे युगों  युगों तक,

हिन्दी के साहित्य शिरोमणि सबकेतुलसीदास.

 

(ब    रामचरित मानस को लिख कर,

किया विश्व में अपना नाम,

वेद, पुराण,उपनिषद को भर,

कर डाला ऐसा  था काम.

राम नाम की महिमा गा कर,

घर घर में  बैठे श्री राम,

तुलसी को रवि माना जग ने,

हम उनको बस करें प्रणाम.|


Saturday, 10 August 2024

 

वृक्ष मौन पर सदा शान्ति के फल उगते हैं,

जो  होते  वाचाल,कलह  उनके  फलते हैं l

जो सुन्दर हो,वही श्रेष्ठ हो,आवश्यक क्या ?

लेकिन  जो  हो श्रेष्ठ, वही सुन्दर लगते हैं l