Saturday, 16 November 2024

 

पुत्र पिता से जाना जाता यही नियम है,

पिता पुत्र से जाना जाये होता कम है l

पिता धन्य है जिसका पुत्र सवाया होता,

दशरथ जाने गये राम से यह अनुक्रम है l

Friday, 15 November 2024

 

कौन जानता था,कि दुश्मन पर पिघल जाओगे,

देश द्रोहियों  के  विचारों  में  ढल  जाओगे |

आज क्या हो  गया तुम्हें तुम्हारे साथियों को,

विशवास नहीं होता कि  इतना बदल जाओगे |

Thursday, 14 November 2024

कुछ करना है जिसे धरा पर उसे कहाँ विश्राम,

सदा कार्यरत रहने  से ही मिल सकते हैं राम l

भोतिक युग  में आज व्यस्त जीवन है सबका,

                                                 इतना समय कहाँ किसको है, लेले जो हरिनाम 

l                                        

                                                   

Wednesday, 13 November 2024

 

पहली बार पाँव  कँपते  हैं, जब  हम रंग मन्च  पर जाते,

किन्तु सतत अभ्यासी बन जो, कला मन्च का धर्म निभाते l

द्दढता,  साहस,  सदाचरण से, तन मन उत्साहित हो जाता,

जीवन  में  निर्भीक  रहे  जो, सदा सफलता  वे  नर पाते l

 

Tuesday, 12 November 2024

 

लालच बुरी बला है इसको सभी जानते,

अर्ध छोड़ सारे को धावे बुरा मानते l

किन्तु स्वार्थ का संग्रह से नजदीकी नाता,

इसीलिये तो सभी फँसे, बस यही चाहते l

Monday, 11 November 2024

 

यही सत्य है, लालच संग्रह को उपजाता,

और स्वार्थ फिर चिनगारी बन उसे जलाता l

संग्रह तब फिर कहाँ रोक पाया लालच को,

यह मन भी बेकाबू हो कर उसे बढाता l

 

Sunday, 10 November 2024

 

यही सत्य है, लालच संग्रह को उपजाता,

और स्वार्थ फिर चिनगारी बन उसे जलाता l

संग्रह तब फिर कहाँ रोक पाया लालच को,

यह मन भी बेकाबू हो कर उसे बढाता l

Saturday, 9 November 2024

 

काम, क्रोध या घृणा भाव ही, संयम रहित विचार,

चिंता  में  गिरता  है  प्राणी, पाता  कष्ट अपार |

पहिले आत्म निरीक्षण कर लो, दुश्चिन्तायें  छोड़,

करती हमको सद प्रवृत्ति  ही, भवसागर  से  पार |

Friday, 8 November 2024

 

दूसरों की रोटियों पर मत पलो

बाँट कर खाओ,सदा फूलो फलो |

संगठन में शक्ति है,समझो इसे,

एक ही है रास्ता, मिल कर चलो |

Thursday, 7 November 2024

 

                       मन  के  भीतर ज्ञान रूप में, परम तत्व का सदा निवास,           

परम शान्ति पाता  है प्राणी, सहज मुक्ति हो यह आभास |

सुख,दुख,हानि,लाभ,यश,अपयश, यही कर्म फल यह ही जान,

दुख, अशांति या क्लेश रहें क्यों? मन में हो उसका विश्वास |

Tuesday, 5 November 2024

 

गेरों  से  भी अपना सा,  दिखलायें  अपनापन,

देश पर निछावर हो हम सबका तन, मन, धन |

वर्ग भेद  छोड़ें सब, हिल मिल  कर  रह पायें,

तो  भविष्य अच्छा  है, होगा तब  अभिनन्दन |

Monday, 4 November 2024

जन्म मृत्यु  के  बीच खड़ा, यह  वर्तमान है,

जीव मृत्यु  की  ओर बढ़ रहा, कहाँ  भान है?

जिसका होता जन्म, मृत्यु भी निश्चित होती,

अल्प समय का सदुपयोग कर, कहाँ ध्यान है ?

  

Sunday, 3 November 2024

 

प्राणी ने मन जीत लिया तो, जग को भी वह जीत जायगा,

दृढ़ संकल्प  सामने रक्खो, तो विचार भी  स्वस्थ आयगा |

अगर वासना मन में जागे, मन पर करो नियन्त्रण तो फिर,

मन को तुम एकाग्र करो तो, उसका तो फल  रंग लायेगा |

Thursday, 31 October 2024

 

दीपावली की शुभ कामनाएं

बना कर देह का दीपक,

जलाओ स्नेह की बाती,

मिटे मन का अँधेरा भी,

प्रकाशित हो  धरा सारी|

दिवाली रोज  मन जाये,

बढ़े धन धान्य जीवन में,

प्रभुल्लित आप  रह पायें,

यही शुभकामना मन की |

हमें  सद  बुद्धि  ऐसी दें,

करें   उपकार  जीवन  में,

बढ़ें हम सब प्रगति पथ पर,

   यही है  चाह  बस मन में  |

निरोगी आप तन मन से,

करें  निस्वार्थ  सेवा  भी,

रहूँ  स्मृति पटल  पर मैं,

यही  है  प्रार्थना  सब से |

यही है प्रार्थना मेरी |

डा० हरिमोहन गुप्त