Friday, 28 February 2025

चढ्ना  है पहाड़ के ऊपर ,झुक कर  चढ्ना होगा,

अगर चाहते मन्जिल पाना, रुक कर चलना होगा |

अकड दिखा कर जो भी चलता, ठोकर खा गिर जाता,

लक्ष्य प्राप्ति हित, हो प्रयास रत,गिर कर उठना होगा | 

Thursday, 27 February 2025

 

         फासला घट जायगा, हमदम बनाओ,

      हो सके तो तुम किसी का गम मिटाओ |

      शान्ति, सुख पा जावगे यह देखना तुम,

      बस किसी के घाव पर मरहम लगाओ |

Tuesday, 25 February 2025

 

दया दिखाओ दीनों के प्रति, तभी याद तुम आ सकते हो,

भला करो जग में रह प्राणी, तभी लाभ तुम पा सकते हो.

र व को जो भी याद करेगा, उससे वह  वर पा  जायेगा,

सच्चे मन से मरा कहो तो, सदा राम मन भा सकते हो.

Monday, 24 February 2025

 

जब अधर्म बढ़ता  धरती पर, कोई संत  पुरुष आता है,

हमको ज्ञान मार्ग  दिखलाने, भारत  ही  गौरव पाता है.

संत अवतरित हुये यहाँ पर, विश्व बन्धु  का पाठ पढाने,

उसका फल हम सबको मिलता,जन जन उनके गुण गाता है.

Sunday, 23 February 2025

गुरुवर सदा सिखाया करते, मन में साहस,दृढ़ता,

आंकी गई श्रेष्ठतम जग में, सदा पिता की क्षमता.

बिन माँगे सलाह मिल जाती अक्सर आम जनों से,

                                                कोई सानी नहीं जगत में,बढ़ कर माँ की ममता. 

Saturday, 22 February 2025

सोच रहा क्या मन में ?

 

पिंजरा तो खाली करना है, रहता किस उलझन में,

                                 प्राणी, सोच रहा क्या मन में | 

विखर जांयगे फूल  सभी जो, महक रहे उपवन में,

                                             पंछी कहता उड़ो यहाँ  से, क्यों  रहता  बन्धन में,   

                               प्राणी, सोच रहा क्या मन में |

व्याकुल हो यह  ही कहता है, क्या  है मैले तन में,

अगले पल की खबर नहीं  है, चला जायगा क्षण में,

                                 प्राणी, सोच रहा क्या मन में | 

कौन देख पाया है कल को, व्याप्त वही कण कण में,

आस दूसरे की  क्या  करना, खुद  देखो  दर्पण  में,

                                प्राणी, सोच रहा क्या मन में | 

जाने  की  बारी  जब आई, लिप्सा क्यों  है  धन में,

अब  भी  समय सोच ले प्राणी, रहना  नहीं चमन में,

                                                                               प्राणी, सोच रहा क्या मन में | 

Saturday, 15 February 2025

 

शब्द को उल्टा करें ===

दया दिखाओ याद आवगे,

भला करो तो लाभ पावगे.

रव से तो वर सब पाते हैं,

मरा कहो तो राम गावगे.

Friday, 14 February 2025

 

जितनी कम जिसकी इच्छायें, उसकी सुखी  रही है काया,

विषय भोग में लिप्त रहा जो, उसने दुख को ही उपजाया.|

सब ग्रन्थों का सार यही है, सुख दुख की यह ही परिभाषा,

तृष्णा, लोभ, मोह को छोड़ो, संतों ने  यह  ही दुहराया |.

Thursday, 13 February 2025

 

अब तक मोह प्रेम वश हो कर जी ललचाया,

झूठे  रिश्ते नाते  जग  में, यह  ही  पाया.

उसने कब चाहा तुम उनको  धन दौलत दो,

केवल दुख में साथ निभा दो, यह ही भाया.

 

Wednesday, 12 February 2025

 

जग सुधर जायगा, खुद  को सुधारिये,

दाग चेहरे  के  दिखें, दर्पण  दिखाइये.|

अँधेरे की क्या मजाल कि वह रह सके,

रोशनी  हो  जायगी,  दीपक  जलाइये.|

Tuesday, 11 February 2025

 

रंग मन्च के अभिनय में सहगान बना दो,

साहस दे कर मुझको भी बलवान बना दो.

देश प्रेम को  जगा सकूं ऐसा  हो माध्यम.

मुझको बस मेहनत का  प्रतिमान बना दो.

 

Monday, 10 February 2025

 

जग सुधर जायगा, खुद  को सुधारिये,

दाग चेहरे  के  दिखें, दर्पण  दिखाइये.

अँधेरे की क्या मजाल कि वह रह सके,

रोशनी  हो  जायगी,  दीपक  जलाइये.

Sunday, 9 February 2025

 

तुम दूसरों  की  रोटियों पर  मत पलो,

तुम बाँट  कर  खाओ, सदा फूलो फलो.

सन्गठन में शक्ति है, इसको समझ लो,

रास्ता है ऐक, तुम सदा मिल कर चलो .