Monday, 31 March 2025

 

यश अपयश विधि हाथ, सोच जो व्यक्ति जिया करते हैं,

हानि लाभ  को  छोड़, व्यक्ति  कर्तव्य  किया करते हैं |

जीवन  या   फिर  मरण सदा  से, उसके  हाथ रहा है,

सुख दुख   में समभाव, वही   अमरत्व पिया  करते हैं |

Sunday, 30 March 2025

 

सफल  रहे  यद्देश्य  पूर्ण  कर्तव्य   तुम्हारा,

                                                 प्रगति पन्थ पर  सदा बढ़े अस्तित्व तुम्हारा |

कर्म  योग  से  यदि  मानव  रिश्ता जोड़ेगा,

स्वयम प्रकाशित  हो जाये, व्यकित्त्व तुम्हारा |

Saturday, 29 March 2025

 

सफल  रहे  यद्देश्य  पूर्ण  कर्तव्य   तुम्हारा,

                                                 प्रगति पन्थ पर  सदा बढ़े अस्तित्व तुम्हारा |

कर्म  योग  से  यदि  मानव  रिश्ता जोड़ेगा,

स्वयम प्रकाशित  हो जाये, व्यकित्त्व तुम्हारा |

Friday, 28 March 2025

 

योग्य हितेषी मित्र मिल सकें, कम होता है,

औषधि गुण कारी, मीठी हो,कम होता है|

स्वार्थ सिद्धि में ही डूबे  हैं, प्राणी जग के,

अपनापन कोई  दिखलाये, कम होता है |

Thursday, 27 March 2025

 

                                                  मन में बस जाग्रत करना है,उच्च भावना,

कठिन परिश्रम से ही मिलती है सराहना |

उसके संग संग ईश कृपा भी है आवश्यक,

सदा तपस्या  से  ही होती  पूर्ण साधना |

 

Wednesday, 26 March 2025

        बहता पानी स्वच्छ  औरर निर्मल होता है,

         आगे बढने  का प्रयास  प्रतिपल  होता है |
        
 सागर कब किसको मिठास दे पाया जग में 
        
 ठहरे पानी  में  अक्सर  दलदल होता है |

Tuesday, 25 March 2025

 

फल देतें  हैं  सदा सभी को, वृक्ष नहीं कुछ खाते,

धरती   को सिंचित करते ही,बादल फिर उड़ जाते |

प्यास बुझाती प्यासे की ही, सरिता लब जल पीती,

पर  उपकारी  जो  होते  हैं, धन्य  वही  हो पाते |

 

Monday, 24 March 2025

 

चन्दन हर  पोधा महकाये  जो समीप है,

जग को जो आलोकित कर दे वही दीप है |

पत्थर चोट सहे, पर फल दें वृक्ष यहाँ पर,

पानी  पी कर  मोती  उगले वही सीप है |

Sunday, 23 March 2025

 

चन्दन हर  पोधा महकाये  जो समीप है,

जग को जो आलोकित कर दे वही दीप है |

पत्थर चोट सहे, पर फल दें वृक्ष यहाँ पर,

पानी  पी कर  मोती  उगले वही सीप है |

Saturday, 22 March 2025

इर्ष्या मन में जगे, समझ लो यही डाह है,

पाने  की  इच्छा हो मन में, यही चाह है l

प्रगति पन्थ पर बढने की जिज्ञासा मन में,

सत्य  यही  है, “जहाँ चाह है  वही राह है”l

  

Friday, 21 March 2025

 

इर्ष्या मन में जगे, समझ लो यही डाह है,

पाने  की  इच्छा हो मन में, यही चाह है l

प्रगति पन्थ पर बढने की जिज्ञासा मन में,

सत्य  यही  है, “जहाँ चाह है  वही राह है”l

 

Thursday, 20 March 2025

 

धर्म आचरण का पालन कर, धर्म जिये जा,

अहंकार को  छोड़, छिपा यह  मर्म जिए जा|

काम,क्रोध,मद,लोभ, सदा से शत्रु रहे हैं,

फल की इच्छा क्यों करता, तू कर्म किये जा|

Wednesday, 19 March 2025

 

नेह  से  नाता रहा मनमीत  का,

है समर्पण सार ही बस प्रीत का l

गीतकारों  ने  सदा  से यह कहा,

दर्द  से  रिश्ता पुराना  गीत  का |

Tuesday, 18 March 2025

 

सत्यं  शिवं  सुन्दरम  की  गूंजी  है वाणी,

सत्यमेव  जयते  की   हमने पढ़ी  कहानी,

ऐक झूठ सौ बार कहें  क्या सच हो सकता,

सच तो सच  है,यही बात जानी पहिचानी l

Monday, 17 March 2025

 

योग्य हितेषी मित्र मिल सकें, कम होता है,

औषधि गुण कारी, मीठी हो, कम होता है

स्वार्थ सिद्धि में ही डूबे  हैं, प्राणी जग के,

अपनापन  कोई  दिखलाये, कम  होता है l