यश अपयश विधि हाथ, सोच जो व्यक्ति जिया करते हैं,
हानि लाभ को छोड़, व्यक्ति कर्तव्य किया करते हैं |
जीवन या फिर मरण सदा से, उसके हाथ रहा है,
सुख दुख में समभाव, वही अमरत्व पिया करते हैं |
सफल रहे यद्देश्य पूर्ण कर्तव्य तुम्हारा,
प्रगति पन्थ पर सदा बढ़े अस्तित्व तुम्हारा |
कर्म योग से यदि मानव रिश्ता जोड़ेगा,
स्वयम प्रकाशित हो जाये, व्यकित्त्व तुम्हारा |
योग्य हितेषी मित्र मिल सकें, कम होता है,
औषधि गुण कारी, मीठी हो,कम होता है|
स्वार्थ सिद्धि में ही डूबे हैं, प्राणी जग के,
अपनापन कोई दिखलाये, कम होता है |
कठिन परिश्रम से ही मिलती है सराहना |
उसके संग संग ईश कृपा भी है आवश्यक,
सदा तपस्या से ही होती पूर्ण साधना |
बहता पानी स्वच्छ औरर निर्मल होता है,
आगे बढने का प्रयास प्रतिपल होता है | सागर कब किसको मिठास दे पाया जग में ठहरे पानी में अक्सर दलदल होता है |
फल देतें हैं सदा सभी को, वृक्ष नहीं कुछ खाते,
धरती को सिंचित करते ही,बादल फिर उड़ जाते |
प्यास बुझाती प्यासे की ही, सरिता लब जल पीती,
पर उपकारी जो होते हैं, धन्य वही हो पाते |
चन्दन हर पोधा महकाये जो समीप है,
जग को जो आलोकित कर दे वही दीप है |
पत्थर चोट सहे, पर फल दें वृक्ष यहाँ पर,
पानी पी कर मोती उगले वही सीप है |
इर्ष्या मन में जगे, समझ लो यही डाह है,
पाने की इच्छा हो मन में, यही चाह है l
प्रगति पन्थ पर बढने की जिज्ञासा मन में,
सत्य यही है, “जहाँ चाह है वही राह है”l
धर्म आचरण का पालन कर, धर्म जिये जा,
अहंकार को छोड़, छिपा यह मर्म जिए जा|
काम,क्रोध,मद,लोभ, सदा से शत्रु रहे हैं,
फल की इच्छा क्यों करता, तू कर्म किये जा|
नेह से नाता रहा मनमीत का,
है समर्पण सार ही बस प्रीत का l
गीतकारों ने सदा से यह कहा,
दर्द से रिश्ता पुराना गीत का |
सत्यं शिवं सुन्दरम की गूंजी है वाणी,
सत्यमेव जयते की हमने पढ़ी कहानी,
ऐक झूठ सौ बार कहें क्या सच हो सकता,
सच तो सच है,यही बात जानी पहिचानी l
औषधि गुण कारी, मीठी हो, कम होता है
अपनापन कोई दिखलाये, कम होता है l