Monday, 30 September 2024

 

झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,

भौतिक लाभ मिल सका उसको, पर पीछे पछताया |

उसका पतन  अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा निश्चित,

मानव के  अनुरूप  कर्म हों,  दूर  हटेगी  माया |

Sunday, 29 September 2024

                                               झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,

भौतिक लाभ मिल सका उसको, पर पीछे पछताया |

उसका पतन  अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा निश्चित,

मानव के  अनुरूप  कर्म होंदूर  हटेगी  माया |

झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,

भौतिक लाभ मिल सका उसको, पर पीछे पछताया |

उसका पतन  अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा निश्चित,

मानव के  अनुरूप  कर्म होंदूर  हटेगी  माया |

झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,

भौतिक लाभ मिल सका उसको, पर पीछे पछताया |

उसका पतन  अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा निश्चित,

मानव के  अनुरूप  कर्म होंदूर  हटेगी  माया |

झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,

भौतिक लाभ मिल सका उसको, पर पीछे पछताया |

उसका पतन  अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा निश्चित,

मानव के  अनुरूप  कर्म होंदूर  हटेगी  माया |

झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,

भौतिक लाभ मिल सका उसको, पर पीछे पछताया |

उसका पतन  अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा निश्चित,

मानव के  अनुरूप  कर्म हों,  दूर  हटेगी  माया |

Saturday, 28 September 2024

 

मन को तुम एकाग्र करो तो, तभी शान्ति का श्रोत बहेगा,

सुन्दर,स्वस्थ विचार रहें मन, सेवा व्रत भी  साथ  रहेगा |  

 शान्ति सदा भीतर है  जैसे, कस्तूरी  मृग नाभि  बसी है,

उससे  नाता  जो  जोड़ेगा, सदा सत्य  का  मार्ग गहेगा |

Wednesday, 25 September 2024

मज़हब हमारे भिन्न, मगर धर्म  एक हो,

धरती पवित्र माँ  है , इरादा तो  नेक हो

अनेकता  में  एकता , सिद्धान्त  हमारा

बलिदान के हित एक नहीं तुम अनेक हो

  

Tuesday, 24 September 2024

 

जीवन  और कर्म को मानो, आदि श्रोत  भगवान,

हृदय कमल में वास उसीका, वह जीवन का प्राण |

सतचित ही आनन्द रूप है, आत्म अंश  है  मात्र,

जप,तप,पूजन,भजन,लगन से, बनती है पहिचान |

Monday, 23 September 2024

 

दिव्य  शक्ति है  पास आपके, तुम चरित्र निर्माता,

गुणी, पारखी सब प्रकार हो, सदगुण तुमको भाता |

त्याग करो जीवन में निशदिन, तो पवित्रता आये,

अनुशासन का सम्बल रक्खो, वह ही बड़ा विधाता |

Sunday, 22 September 2024

 

कंटक मग पर बहती सरिता सबको निर्मल जल मिलताहैं ,
पत्थर चोट सहे पर फिर भी हमे वृक्ष  से फल मिलता हैं |
जो पर हित में रहते तत्पर .उनका ही भविष्य उज्ज्वल हैं, 
भला करो तो लाभ मिलेगा ,इसका फल प्रति पल मिलता हैं |

Saturday, 21 September 2024

 लक्ष्य सामने रखने वाले, कभी नहीं  रुकते हैं

जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं

धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य  बनाओ निश्चित

कितनी भी  कठिनाई आए , कभी नहीं झुकते हैं

 लक्ष्य सामने रखने वाले, कभी नहीं  रुकते हैं

जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं

धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य  बनाओ निश्चित

कितनी भी  कठिनाई आए , कभी नहीं झुकते हैं

 लक्ष्य सामने रखने वाले, कभी नहीं  रुकते हैं

जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं

धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य  बनाओ निश्चित

कितनी भी  कठिनाई आए , कभी नहीं झुकते हैं

 

लक्ष्य सामने रखने वाले, कभी नहीं  रुकते हैं

जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं

धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य  बनाओ निश्चित

कितनी भी  कठिनाई आए , कभी नहीं झुकते हैं