झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,
भौतिक लाभ मिल
सका उसको, पर पीछे पछताया |
उसका पतन अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा
निश्चित,
मानव के अनुरूप
कर्म हों,
दूर
हटेगी माया |
झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,
भौतिक लाभ मिल
सका उसको, पर पीछे पछताया |
उसका पतन अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा
निश्चित,
मानव के अनुरूप कर्म हों, दूर हटेगी माया |
भौतिक लाभ मिल
सका उसको, पर पीछे पछताया |
उसका पतन अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा
निश्चित,
मानव के अनुरूप कर्म हों, दूर हटेगी माया |
भौतिक लाभ मिल
सका उसको, पर पीछे पछताया |
उसका पतन अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा
निश्चित,
मानव के अनुरूप कर्म हों, दूर हटेगी माया |
भौतिक लाभ मिल
सका उसको, पर पीछे पछताया |
उसका पतन अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा
निश्चित,
मानव के अनुरूप
कर्म हों,
दूर
हटेगी माया |
झूठ, कपट, छल से जिसने भी, धन वैभव को पाया,
भौतिक लाभ मिल
सका उसको, पर पीछे पछताया |
उसका पतन अवश्यम्भावी, दुख उपजेगा
निश्चित,
मानव के अनुरूप
कर्म हों,
दूर
हटेगी माया |
लक्ष्य सामने रखने वाले, कभी नहीं रुकते हैं
जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं
धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य बनाओ निश्चित
कितनी भी कठिनाई आए , कभी नहीं झुकते हैं
जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं
धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य बनाओ निश्चित
कितनी भी कठिनाई आए , कभी नहीं झुकते हैं
जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं
धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य बनाओ निश्चित
कितनी भी कठिनाई आए , कभी नहीं झुकते हैं
लक्ष्य सामने रखने वाले, कभी नहीं
रुकते हैं
जो श्रम के आदि हो जाते , कभी नहीं थकते हैं
धीरे धीरे चलो , सामने लक्ष्य बनाओ निश्चित
कितनी भी कठिनाई आए , कभी नहीं झुकते हैं