खाली हाथ नहीं आये तुम, भाग्य साथ ले आये,
खाली हाथ नहीं जाओगे, कर्म साथ ले जाए l
यह जीवन ही कर्म भूमि है, जिसको तुम्हें निभाना,
नहीं किये सद्कर्म यहाँ तो, जा कर वह पछताये l
भौतिक विकास की सुविधायें, हमें बनाती सदा विलासी,
हम प्रकाश की ओर बढ़ें यदि,तन्मय हो कर हो अभ्यासी l
अन्धकार तो स्वयं छटेगा, बन जाएँ यदि द्दढ विश्वासी ,
सोपानी क्रम से बढ़ सकते, आत्मशुद्धि के हों अभिलाषी l
माँ देती है जन्म, गुरु जीवन को देता,
कुम्भकार की रही भूमिका, अपना लेता l
इनसे मानो उऋण नहीं कोई हो सकता,
अलग अलग दायित्व निभाता,बने प्रणेता l
हीरे का क्या मूल्य लगायें, जो जैसा होगा वह देगा,
जो कोई पत्थर मानेगा, तो वैसा ही मूल्य लगेगा l
बहुत कठिन हैं मोल लगाना, सब में ज्ञान कहाँ होता है,
कुशल,पारखी और अनुभवी, बस अमूल्य है,यह कह देगा l
श्रमित समय का अंशदान जिनका है जीवन,
सहभागी हो कष्टों में जो भी पीड़ित जन l
सब में हो सदभाव, साधना ऐसी करिये,
तभी आपको हो सकता ईश्वर का दर्शन l
योग,यज्ञ,जप,तप,संकीर्तन,भजन उपासना,
सभी व्यर्थ हैं, त्यागो पाहिले अहं वासना l
अहंकार से विरत मनुज सुख पाता रहता,
तृष्णा ,ममता ,मोह सभी की नहीं चाहना l
बृह्म अनन्त,अचिन्त्य,अगोचर,अदभुत होता,
आत्म चेतना,आत्म निरिक्षण व्यर्थ न खोता l
साधन हैं ये मात्र सतत ही करें साधना,
वह साधक है, अहंकार को जो भी धोता l
हों सजग हम,यही सबको बताना है,
करो मजबूत खुद को, यह दिखाना है l
हर समय उत्तम समय आता नहीं है,
समय को ही हमें उत्तम बनाना है l
स्वयम पीड़ित हो उठे मन, बस दूसरे के दर्द में,
सौप दें कम्बल, दुशाला, कोई अगर हो सर्द मे l
कर सको उपकार, तो तुमको ख़ुशी मिल जायगी,
हो सदा ही भाव सेवा, यह भावना हो मर्द में l
तिमिर स्वयम छटता जाता है, पा कर पुंज प्रकाश.
जटिल प्रश्न तक हल हो जाते, लेकर द्दढ विश्वास l
विषम और गम्भीर परिस्थिति माप दण्ड है सच के,
जीवन में द्दढ संकल्पों से, होता बुद्धि विकास l
कागज पर ही लुप्त हो गये उनके वादे,
और सामने केवल इनके गलत इरादे l
आदर्शों की कसमें उनकी सभा मन्च तक,
अन्तर मन काले हैं, ऊपर सीधे सादे l
जिन्दगी का मौत से ऐसा लगाव है,
बदले हुये लिवास में आना स्वभाव है l
रुक कर सफर में कोई सुस्ताने लगे पथिक,
मैं सोचता हूँ मौत ही ऐसा पड़ाव है l
जीवन में संघर्षों का क्रम चलता आया है,
और रात की गोद प्रात पलता आया है l
चिर अशांति या पीड़ित मन आलोकित करने,
सम्बन्धों का स्नेह सदा जलता आया है l
कलुषित असत विचारों को बस धोते जाओ,
बीज सफलता के जीवन में बोते जाओ l
तुममें अहंकार न पनपे बस जीवन में,
है मेरा आशीष अग्रसर होते जाओ l