आदि काल से बहता आया, नहीं रुका नदियों का पानी,
सदा सत्य का मार्ग प्रदर्शन, करती है मुनियों की वाणी |
कवि ही नई दिशा देता है, सदा राष्ट्र जाग्रत करने में,
उसका हृदय बहुत कोमल है, इसीलिए जग में सम्मानी |
पैर जब कभी चादर
से बाहर को आते हैं,
उसूलों से बड़े
जब ख्बाव हो जाते हैं |
परेशानी का
अनुभव तो देर से होता.
जब अपने साथी साथ छोड़ कर जाते हैं |पैर जब कभी चादर से बाहर को आते हैं,
उसूलों से बड़े
जब ख्बाव हो जाते हैं |
परेशानी का
अनुभव तो देर से होता.
जब अपने साथी साथ छोड़ कर जाते हैं
|पैर जब कभी चादर से बाहर को आते हैं,
उसूलों से बड़े
जब ख्बाव हो जाते हैं |
परेशानी का
अनुभव तो देर से होता.
जब अपने साथी साथ छोड़ कर जाते हैं |
पैर जब कभी चादर से बाहर को आते हैं,
उसूलों से बड़े
जब ख्बाव हो जाते हैं |
परेशानी का
अनुभव तो देर से होता.
जब अपने साथी साथ छोड़ कर जाते हैं |
नहीं हम आज कहते हैं, पुरानी
यह कहावत है,
सही ईमान दिल ने सर्वदा ही दु:ख
को झेला |
मगर जब जान जाते असलियत तो साफ़ होता है,
सदा ही
सत्य जीता है, नहीं
उससा कोई होगा |
उम्मीद क्यों रखते हो अपनी शान की,
नेक नीयत ही भली आपके ईमान की |
रव करेगा हर मदद,यह छोड़ दो उस पर,
फ्रिक्र रहती
है उसे, सारे जहाँन की |
काम में यदि है अनिच्छा तो बला है,
काम में यदि मन लगे तो यह कला है |
हो लगन बस काम में यह ही प्रमुख है,
वह सफल
है, पास
जिसके हौसला है
लक्ष्य सामने रखने वाले, कभी नहीं रुकते
हैं,
जो श्रम के आदी हो जाते,कभी नहीं थकते
हैं l
धीरे धीरे चलो, सामने लक्ष्य
बनाओ निश्चित,
कितनी भी कठनाई आये, कभी नहीं झुकते
हैं l
देश ,परिस्थिति
और काल का, जिसको
रहता ज्ञान,
साहस, शोर्य जगाने का ही, जो
करता अभियान
वैसे से
तो वह सरल प्रकृति का, प्राणी है बस,
मिटता है आन,वान पर, यह उसकी पहिचान l
उगाओ प्रीति हरयाली,
बंधाओ प्रेम की राखी,
करो सम्मान नारी का,
सजाओ इस धरा को तुम,
जगाओ शौर्य को अपने,
दया का भाव मन हो,
जियेंगे शान्ति हित में हम,
झुकाओ इस गगन को तुम |
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