बेटा अमरीका बसा, बेटी भी है दूर,
उम्रर पचासी कट रही, हो करके मजबूर |
जाना है सब छोड़ कर, अंत समय प्रभु पास,
माया, ममता, मोह का, त्याग करो बन दास |
आप अगर यह चाहते, जग में हो सम्मान,
कार्य श्रेठतम कीजिये, यही बने पहिचान |
आप बचाएं आय से, दस प्रतिशत श्री मान,
यह भविष्य निधि आपकी, सोयें सीना तान |
उसकी कृपा सदैव है,भाव रहे निस्वार्थ।
अहंकार बस छोड़ दो,है बस यही यथार्थ।
आवश्यकता से अधिक, धन संग्रह है पास,
निर्धन जन में बाँटिये, सुखी रहें, विश्वास |
आवश्यक जो काम हैं, प्रथम करें श्री मान,
शेष काम हों बाद में, इसे लीजिये मान |
आवश्यक चाभी सदा, दो दो रखें सभाँल,
समय कभी यदि आ पड़े, मिल सकती तत्काल |
रेस्टोरेंट में जब कभी, आप बनें मेहमान,
मीनू आप न देखिये, पाओगे सम्मान |
बच्चों को भी खुश रखें, सुख दे गुजरे शाम,
टाफी, बिस्कुट दीजिये, पायें फिर आराम |
व्यस्त आप रहिये सदा, मनोभाव अनकूल,
व्यर्थ विवादों में नहीं, पडें, नहीं हो भूल |
कटु वाणी ही आपकी, करती गहरे घाव,
सोच समझ कर बोलिए, वाणी करे बचाव |
अगर शान्ति सुख चाहते, करिये कुछ उपकार,
सुखद नींद से जागिये, ले कर प्रभु का नाम,
दिन अपना रसमय रहे, अच्छा हो परिणाम |
कभी मित्र को फोन पर, बातें करिये आप,
बिछुड़े जैसे मिले हों, यही पड़ेगी छाप |
कुछ मित्रों के जन्म दिन, अगर आपको याद,
उसे याद उस दिन करें, वह भी देगा दाद |
गुण विशेष है आप में, मिला तभी अधिकार,
शिष्टाचार निभाइये, तुम्हें मिलेगा प्यार |
दया भाव यदि पास है, इसका पड़े प्रभाव,
सदा याद रखिये इसे, इससे बढ़े लगाव |
रखो ध्यान निज स्वास्थ्य का, इस पर करो विचार,
परामर्श लेते रहो, कम ही लो आहार |
मोबाइल के बिना भी, जीना है दुस्वार,
सीख लीजिये इसे भी, इस पर करो विचार |
आप प्रशंसा तो करें, जिससे हो तकरार,
बस प्रभाव तब देखिये, माने वह उपकार |
आवश्यकता आज की, कम्प्यूटर श्री मान,
इसे जानिये समय से, बन जाए पहिचान |
क्षमा करें इक बार ही, किन्तु नहीं दो बार,
दया व्यर्थ हो जायगी, क्षमा किया हर बार |
जान लीजिये इसे भी, कब रहना है मौन,
उचित बोलना है भला, तुमसे बढ़ कर कोन |
बार बार यह सोचिये, तभी बताएं भेद,
यदि कुपात्र निकला वही, तुमको होगा खेद |
करें प्रशंसा भीड़ में, समझाएं घर,द्वार,
सुधर जायंगी गलतियाँ, यह ही नेक विचार |
पता चलेगा जान कर, कितना हृदय विशाल,
जमा बेंक में क्या पता, जिससे मालामाल |
दया चाहते जीव भी, बनिये आप उदार,
उनकी सेवा भी करें, यह होगा उपकार |
जब बुराई हम देखते, मन में हो संताप,
अच्छाई तो देखिये, बड़े बनेंगे आप |
धन मिलता यदि चेक से, करो चेक भुगतान,
सोच समझ कर आप भी, निर्णय लें तत्काल,
कम बोलें धीरे सदा, यही मन्त्र है ढाल |
सब बुराई ही देखते, अच्छा देखें आप,
उसका प्रतिफल देखिये, पड़े अनूठी छाप |
काया उसकी भी मरी, जिसे देह अभिमान,
केवल बस गुण, कर्म ही, सदा बढाते मान |
दया धर्म यदि पास है, इसका पड़े प्रभाव,
साहस के संग योयता, यही सफलता मन्त्र,
वाणी में हो मधुरता, तोड़ें सारे तन्त्र |
स्वागत करना चाहिये, जो भी आये द्वार,
आप खड़े हो जाइये, बहे नेह की धार |
पत्नी, बच्चों को कभी, नहिं डाटे बाजार,
घर आ कर समझाइये, होगा उचित सुधार |
निर्णय लेना बाद में, हट जाये जब क्रोध,
निश्चित दुखदायी सदा, मानो यह अनुरोध |
खर्च सदा कम, आय से, बतलाते हैं लोग,
लेन देन हो नगद ही, तो तुम सुख को भोग |
पुत्र प्रगति यदि चाहते, साहस भरो अटूट,
माफ़ी जिसने मांग ली, उसे न दें उपदेश,
अगर सीख दी आपने, पँहुचे उसको ठेस |
कार्य सफलता में सदा, रहे योग्यता पास,
अनुभव भी होता प्रमुख, इसे मानिए ख़ास |
गलती जो तुमसे हुई, सीखें उससे आप,
पुन: नहीं होगी कभी, मिटे सदा संताप |
वही बड़े होते सदा, जिनका हृदय विशाल,
अच्छी चीजें मिलेंगी, ऊँची है दूकान,
अक्सर मिलते वहाँ पर,फीके ही पकवान |
शुभ विचार आयें तभी, कर डालो वह काम,
उसने पाई सफलता, किया नहीं विश्राम |
अस्पताल में कोइ हो, अपना यदि मजबूर,
उसे सांत्वना चाहिए, दे दो तुम भरपूर |
आयें स्वच्छ विचार जब, रखिये इन्हें सहेज,
पाँव सफलता पूजती, करते क्यों परहेज ?
भले लगे यह उचित है, जल्द न निर्णय लेंय,
परामर्श उस पर करें, यही बनाएं ध्येय |