Thursday, 31 October 2024

 

दीपावली की शुभ कामनाएं

बना कर देह का दीपक,

जलाओ स्नेह की बाती,

मिटे मन का अँधेरा भी,

प्रकाशित हो  धरा सारी|

दिवाली रोज  मन जाये,

बढ़े धन धान्य जीवन में,

प्रभुल्लित आप  रह पायें,

यही शुभकामना मन की |

हमें  सद  बुद्धि  ऐसी दें,

करें   उपकार  जीवन  में,

बढ़ें हम सब प्रगति पथ पर,

   यही है  चाह  बस मन में  |

निरोगी आप तन मन से,

करें  निस्वार्थ  सेवा  भी,

रहूँ  स्मृति पटल  पर मैं,

यही  है  प्रार्थना  सब से |

यही है प्रार्थना मेरी |

डा० हरिमोहन गुप्त

Wednesday, 30 October 2024

 

दीपावली की शुभ कामनाएं

बना कर देह का दीपक,

जलाओ स्नेह की बाती,

मिटे मन का अँधेरा भी,

प्रकाशित हो  धरा सारी|

दिवाली रोज  मन जाये,

बढ़े धन धान्य जीवन में,

प्रभुल्लित आप  रह पायें,

यही शुभकामना मन की |

हमें  सद  बुद्धि  ऐसी दें,

करें   उपकार  जीवन  में,

बढ़ें हम सब प्रगति पथ पर,

   यही है  चाह  बस मन में  |

निरोगी आप तन मन से,

करें  निस्वार्थ  सेवा  भी,

रहूँ  स्मृति पटल  पर मैं,

यही  है  प्रार्थना  सब से |

यही है प्रार्थना मेरी |

डा० हरिमोहन गुप्त

Tuesday, 29 October 2024

                                                उसने जो कुछ दिया बहुत है, बस उससके गुण गायें,

ऊपर क्यों? नीचे को देखें, फिर मन  को  समझायें |

हमसे जो भी गुणी योग्य है, उससे  ही  कुछ सीखें,

सन्तोषी रहअंहकार  तजआदर  भाव  जतायें |

उसने जो कुछ दिया बहुत है, बस उससके गुण गायें,

ऊपर क्यों? नीचे को देखें, फिर मन  को  समझायें |

हमसे जो भी गुणी योग्य है, उससे  ही  कुछ सीखें,

सन्तोषी रह,  अंहकार  तज,  आदर  भाव  जतायें |

Monday, 28 October 2024

 जग सुधर जायेगा, खुद को  सुधारिये,

दाग चेहरे  के  दिखें, दर्पण  दिखाइये |

अँधेरे की क्या मजाल कि वह रह सके,

रोशनी  हो  जायेगीदीपक  जलाइये |

जग सुधर जायेगा, खुद को  सुधारिये,

दाग चेहरे  के  दिखें, दर्पण  दिखाइये |

अँधेरे की क्या मजाल कि वह रह सके,

रोशनी  हो  जायेगीदीपक  जलाइये 

|जग सुधर जायेगा,


खुद को  सुधारिये,

दाग चेहरे  के  दिखें, दर्पण  दिखाइये |

अँधेरे की क्या मजाल कि वह रह सके,

रोशनी  हो  जायेगीदीपक  जलाइये |

जग सुधर जायेगा, खुद को  सुधारिये,

दाग चेहरे  के  दिखें, दर्पण  दिखाइये |

अँधेरे की क्या मजाल कि वह रह सके,

रोशनी  हो  जायेगी,  दीपक  जलाइये |

Sunday, 27 October 2024

 गेरों  से  भी अपना सादिखलायें  अपनापन,

देश पर निछावर हो हम सबका तन, मन, धन |

वर्ग भेद  छोड़ें सब, हिल मिल  कर  रह पायें,

तो  भविष्य अच्छा  है, होगा तब  अभिनन्दन |

गेरों  से  भी अपना सादिखलायें  अपनापन,

देश पर निछावर हो हम सबका तन, मन, धन |

वर्ग भेद  छोड़ें सब, हिल मिल  कर  रह पायें,

तो  भविष्य अच्छा  है, होगा तब  अभिनन्दन 

|गेरों  से  भी अपना सादिखलायें  अपनापन,

देश पर निछावर हो हम सबका तन, मन, धन |

वर्ग भेद  छोड़ें सब, हिल मिल  कर  रह पायें,

तो  भविष्य अच्छा  है, होगा तब  अभिनन्दन |

गेरों  से  भी अपना सा,  दिखलायें  अपनापन,

देश पर निछावर हो हम सबका तन, मन, धन |

वर्ग भेद  छोड़ें सब, हिल मिल  कर  रह पायें,

तो  भविष्य अच्छा  है, होगा तब  अभिनन्दन |