Thursday, 10 May 2018

उठो देवियो सुबह हुई,


उठो देवियो सुबह हुई, आलस को त्यागो
बहुत देर सो लिया,समय है अब तो जागो।
        पौराणिक इतिहास पढ़ो, बल है यह जानो,
        दुर्गा, सीता, सावित्री हो, यह तो मानो।
        रणचण्डी बन कर तुमने ही संहार किया है,
सोया साहस, शोर्य कला को तो पहिचानो।
अंग प्रदर्शन ,भडकीले वस्त्रों को त्यागो,
इष्र्या, द्वेष, दम्भ, कपट से अब भागो।
        क्यों दहेज उत्पीड़न होता आज तुम्हारा,
        जल कर मरना,शेष बचा है ऐक सहारा,
        केवल बहुयें जलें,आज हम सब यह मानें,
        लगता आज परिस्थितियों से जीवन हारा।
नर भक्षी हैं,सभी, तुम्हें ये नोच खायेंगे ,
मेरी मानो, अब मिसाइल को इन पर दागो।
 चौराहों पर छेड़ छाड़ कर तुम्हें सताना,
तुम पर अब तेजाब फेकना, काम घिनोना।
 कब तक यह उत्पीड़न होगा, जरा सोचिये,
बलात्कार कर तुम्हें मारना, और भगाना।
अब साहस को तुम बटोर, निर्भीक बनो तो,
आत्म सुरक्षा शासन से इस हक को माँगो।
बनो चावला, फिर से तुम अब बनो कल्पना,
वेदी किरण सरीखा साहस ही बटोरना।
इंदिरा गाँधी बन कर तुमको आज दिखाना,
 निष्ठा, लगन, परिश्रम, लाये नई चेतना।
          केवल शिक्षा दे सकती है नई उॅचाई,
          हो कर के निर्भीक, समय है अब भ्री जागो।
          लिया, समय है अब तो त्यागो।